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चंबल में फिर दिकने लगे मगरमच्छ और घड़ियाल....

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मगरमच्छ। संवाद - फोटो : ETAWAH
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चकरनगर। जलस्तर सामान्य और पानी साफ होने पर चंबल नदी में मगरमच्छ और घड़ियाल फिर दिखने लगे हैं। सेंचुरी के अफसरों का कहना है कि एक माह की परेशानी के बाद जलीय जीवों का चंबल में जीवन सामान्य होने लगा है।
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राष्ट्रीय अभ्यारण चंबल नदी में वर्ष 2022 की गणना के मुताबिक चार हजार से अधिक मगरमच्छ, 4500 घड़ियाल, 2000 डॉल्फिन, विभिन्न प्रकार के कछुओं और मछलियों की संरक्षित प्रजातियां हैं। यह सभी अपना कुनबा बढ़ा रहे हैं। मई-जून में घड़ियालों, कछुओं और मगरमच्छों ने अंडे देकर चंबल की रेत में संरक्षित किए थे। 10 दिन पहले राजस्थान के कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद चंबल का जलस्तर बढ़ने लगा था। इसके बाद चकरनगर और ताखा क्षेत्र में आई बाढ़ ने जलीय जीवों के लिए परेशानी खड़ी कर दी थी।
बड़े मगरमच्छ और कछुए तो बाढ़ के गंदे पानी में जीवित रह गए, लेकिन घड़ियाल और डॉल्फिन खतरे को देखते हुए चंबल की तलहटी में चले गए थे। अब बाढ़ का पानी कम होने के बाद फिर चंबल का जल स्वच्छ होने लगा है। इस कारण मगरमच्छ, घड़ियाल और डॉल्फिन फिर विचरण करने लगे हैं। सेंचुरी रेंजर हरि किशोर शुक्ला ने बताया कि इस बार बाढ़ के पानी में चंबल नदी के दूर किनारों तक बालू आ गई है। यह जलीय जीवों के प्राकृतिक वास के लिए अनुकूल होगी।
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रेंजर ने बताया कि बाढ़ में मगरमच्छ, घड़ियाल और कछुओं के बच्चे बस्ती की ओर भी पहुंच गए थे। लगातार रेस्क्यू किया जा रहा है। अब तक चार मगरमच्छ व 11 कछुओं के बच्चों को चंबल में छोड़ा गया है। वहीं बड़े जलीय जीव भी लगातार तलहटी और छोटे-छोटे मुहानों से निकलकर बीच नदी में आ रहे हैं।
चंबल सेंचुरी के डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि चंबल नदी में आई बाढ़ के बावजूद किसी भी संरक्षित बड़े जलीय जीव की क्षति नहीं पहुंची। सभी सुरक्षित हैं। इन जीवों के बच्चों की संख्या का आंकलन किया जा रहा है। हर बार बाढ़ के दौरान मात्र पांच प्रतिशत ही बच्चे जीवित बचते हैं, जो अभियरण के लिए सामान्य संख्या है।
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