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जिला अस्पताल में बच्चों के डाक्टरों का टोटा

Mon, 16 May 2016 11:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष के बाहर लगी मरीजों की कतार। - फोटो : अमर उजाला
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इटावा। जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में छह डाक्टरों की ज्वाइनिंग के बाद डाक्टरों की कमी दूर ही हो पाई थी कि अब एक नया संकट फिर से खड़ा हो गया है। यह नई मुसीबत जिला अस्पताल के तीन में से दो बाल रोग विशेषज्ञ डाक्टरों के उपलब्ध न होने की है। जहां एक डाक्टर ट्रेन की चपेट में आकर गंभीर घायल हो चुके हैं तो वहीं दूसरे तीन माह के अवकाश पर हैं। ऐसे में सिर्फ एक डाक्टर के जिम्मे ही पूरा अस्पताल हो गया है। जिससे इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे बच्चों व उनके परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में डाक्टरों का संकट पुरानी मुसीबत है जो अभी हाल में आठ नए डाक्टरों की नियुक्ति के बाद छह क ी ज्वाइनिंग होने पर कुछ हद तक दूर हुई। अब अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी नई मुसीबत बनकर सामने आई है। जिला अस्पताल में अभी तक तीन बाल रोग विशेषज्ञ डा. बीएस अग्निहोत्री, डा. आरके चौरसिया व डा. मनोज श्रीवास्तव मौजूद थे। रोज डेढ़ सौ से 200 बच्चों अस्पताल आ रहे हैं।
लगभग 20 दिन पूर्व संविदा पर जिला अस्पताल में कार्यरत पूर्व सीएमएस डा. बीएस अग्निहोत्री तीन 03 माह की छुट्टी लेकर जनपद से बाहर चले गए हैं। इसके कुछ दिनों बाद ही डा आरके चौरसिया के साथ दुखद घटना हुई और वह कानपुर जाते समय रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गए। जिसके बाद से वह सैफई मिनी पीजीआई में भर्ती चल रहे हैं। दो चिकित्सकों के अस्पताल न पहुंचने से अब जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में सिर्फ डा. मनोज श्रीवास्तव ही शेष बचे हैं। ऐसे में प्रतिदिन 100 से 200 मरीजों को देखना उनके लिए भारी मुसीबत बन चुका है। एक ओर ओपीडी कर इतने मरीजों को देखना उसके बाद वार्ड में भर्ती बच्चों क ो देखना एक मात्र डाक्टर के लिए टेढ़ी खीर बन चुका है।
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नतीजा यह है कि बड़ी संख्या में मरीजों को यहां से बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है। सुबह से दोपहर तक बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचे मरीजों को बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष के बाहर लंबी कतार लगानी पड़ रही है। वहीं बीच में डाक्टर के उठकर वार्ड में चले जाने से मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
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