इटावा। घटिया अजमत अली में इमाम बारगाह में महजबी की बरसी पर मजलिस का आयोजन हुआ। इसमें कानपुर से आए मौलाना हाफिज शाहिद बाकरी ने कहा कि मजलिस में आने से किरदार बदलता है, मगर यह इंसान की सोच पर निर्भर है कि उसने मजलिस से क्या पाया।
कहा कि मजलिस बहुत हो रही हैं, लेकिन इंसान वहीं का वहीं है। इंसान की नीयत में कमी है। क्योंकि हमने घर से निकलते वक्त सोचा ही नहीं मजलिस में जा रहे हैं। कुरान कह रहा है कि इंसान के पास जो परेशानी आती है वह उसी की कमाई है। इंसान को रमजान के महीने की पहचान करनी होगी। अगर इंसान रमजान की अहमियत को समझ जाए तो रोजा, नमाज, इबादत और कुरान की तिलावत से दूर नहीं रहेगा। रमजान के महीने में अल्लाह सभी को बख्श देगा। कहा इंसान के घरों में कुरान ताख पर रख दिया जाता है। कुरान सिर्फ ताख पर रखने या चूमने के लिए नहीं है, बल्कि कुरान की आयतों को दिल में उतारा जाए। मजलिस में तस्लीम रजा, सलीम रजा, जहूर नकवी ने सोजख्वानी की। तनवीर हसन, तस्लीम रजा, सलीम रजा ने भी तकरीर की। तालिब रिजवी, आबिद रिजवी, आसिफ रिजवी अश्शू, हाजी कमर अब्बास नकवी, शावेज नकवी, मो. अब्बास, मो. मियां, राहत हुसैन रिजवी आदि मौजूद रहे। (संवाद)