इटावा। नियमों का उल्लंघन कर रोडवेज चालक बस को प्लेटफार्म की बजाए इधर-उधर खड़ी कर रहे हैं। इससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। प्लेटफार्म पर पहुंचने पर पता चलता है कि उनकी बस बाहर खड़ी है। कई बार तो बस छूट तक जाती है।
इस समय सहालग का दौर चल रहा है। कड़ाके की सर्दी से राहत मिलने के बाद यात्री भी सफर करने के लिए निकलने लगे हैं। बावजूद इसके चालक बसों को निर्धारित प्लेटफार्म पर खड़ा न करके परिसर में ही खड़ा करते आ रहे हैं। आलम यह है कि चालक पूछताछ केंद्र के सामने से लेकर प्रवेश द्वार तक दो से तीन लाइनों में बसें खड़ी रखते हैं। बाहर सड़क पर भी बसें खड़ी करके सवारियों को भरा जा रहा है। कई बार प्रवेश द्वार पर बसें इस कदर खड़ी रहती हैं कि दो पहिया वाहन भी आसानी से बस स्टैंड के अंदर नहीं जा सकते। कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। कानपुर या आगरा की तरफ जैसे ही बसें मुड़ती हैं दूसरे वाहन नहीं पाते और जाम लग जाता है।
बसों के परिचालकों में यात्रियों को बैठाने की होड़ रहती है। कई यात्री तो बस स्टैंड के अंदर ही प्रवेश नहीं कर पाते और परिचालक उन्हें बस में बिठा लेते हैं। बस स्टैंड पर 21 प्लेटफार्म हैं, जबकि कुछ मार्गों की बसें ही प्लेटफार्म पर खड़ी होती हैं। इटावा से सबसे ज्यादा यात्री फर्रुखाबाद, मैनपुरी, आगरा और कानपुर के मिलते हैं, लेकिन इन स्थानों की बसें निर्धारित प्लेटफार्म पर खड़ी नहीं मिलतीं। बसों की संख्या बढ़ने पर पूछताछ केंद्र से इन्हें हटाने की चेतावनी देनी पड़ती है।
मिथलेश सक्सेना ने बताया कि अक्सर गांव टिमरुआ जाने के लिए सैफई की बस से जाना होता है, लेकिन जब भी जाओ बसें इधर-उधर ही खड़ी मिलती हैं। सैफई जाने वाली बस शायद ही कभी प्लेटफार्म पर खड़ी मिली हों। चालकों को बुजुर्गों का ध्यान रखना चाहिए।
राम देवी ने बताया कि उनकी बेटी सोनीपत में रहती है। महीने में एक-दो बार जाना होता है। इसके लिए दिल्ली जाने वाली बसें पकड़नी होती है। घुटनों में दर्द होने की वजह से बस में चढ़ने में दिक्कत होती है। प्लेटफार्म पर बसें लगें तो चढ़ने में इतनी परेशानी न हो।
रोडवेज बस चालकों को स्पष्ट निर्देश हैं कि बसें निर्धारित प्लेटफार्म पर ही खड़ी करें, लेकिन समस्या यह है कि करीब महीने भर से वन-वे व्यवस्था होने की वजह से सभी जल्दी जाने के चक्कर में रहते हैं। जल्द सुधार दिखाई दे, इस बारे में अधिकारियों से चर्चा करेंगे।
- श्याम दुबे, रोडवेज स्टेशन इंचार्ज।