फोटो 27:::गुरुवार को शहर में छाये बादल। संवाद
फोटो 28:::कृषि वैज्ञानिक भूपेंद्र सिंह। संवाद
बिपरजॉय तूफान का जिले में भी असर, धान की नर्सरी पर खतरा
क्रासर
- मंगलवार को बदली छायी रही, विशेषज्ञ बोले- प्रदेश में प्रभाव बढ़ने से होगा फसलों को नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। पर्यावरणीय असंतुलन का असर साफ नजर आ रहा है। बिपरजॉय तूफान के चलते यूपी में मानसून देरी से आने की संभावना जताई जा रही है। वहीं जिले में भी गुरुवार को असर नजर आया। पूरे दिन बदली छायी रही। तेज हवाएं भी रुक-रुकर चलती रहीं। कृषि वैज्ञानिकों की मानें, यदि यह तूफान प्रभावी हुआ तो इससे धान की नर्सरी का नुसान होगा।
जून के पहले सप्ताह में यूपी में मानसून अपनी दस्तक देता है, लेकिन इस बार जून का मध्य गुजरने पर भी मानसून नहीं आ सका। इसके चलते धान की नर्सरी में देरी हो रही है। मानसून अगर जल्द नहीं आया तो पानी की कमी से धान की नर्सरी में देरी होगी और उसके बाद होने वाली फसलों पर भी खासा प्रभाव पड़ने की आशंका है। मानसून देरी से आने का कारण बिपरजॉय तूफान देश में आने के कारण है। जिले में मानसून देरी से आने पर किसानों के चेहरे पर भी चिंता की लकीरें दिखाई दे रही है। कृषि वैज्ञानिक ऐसा मान कर के चल रहे हैं कि, मौसम का जिस तरीके का बदलाव देखा जा रहा है वह धान की फसल के लिए खासा नुकसान दायक बनता हुआ दिख रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ भूपेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदेश में मानसून जून के पहले सप्ताह ने आने की उम्मीद होती है, लेकिन अरब सागर से उठा बिपरजॉय तूफान गुजरात के तट तक पहुंचने की बात सामने आई है। इस कारण प्रदेश में आने वाले मानसून में देरी हो रही है। अगर ज्यादा समय तक मानसून नही आया तो धान की नर्सरी में देरी होगी और धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है। इस ढंग से इस समय व्यापक गर्मी पड़ रही है। यह गर्मी धान की रोपाई के लिए खासा नुकसानदायक बन रही है। असल में 41 डिग्री के ऊपर लगातार चल रहा है। तापमान के चलते धान की रोपाई खासी तादात में प्रभावित हो रही है। अगर धान की रोपाई किसान अपने खेतों में करता है तो धान की पौध सूख कर के नष्ट होने की संभावनाएं बहुत अधिक हो जाएगी।