स्वच्छता मिशन की कड़ी में रेलवे ने एक और पहल करते हुए देश भर के स्टेशनों व ट्रैक को गंदगी मुक्त बनाने की योजना तैयार की है। इस पर जोर शोर के साथ कार्य भी शुरू कर दिया गया है। योजना के तहत सभी यात्री ट्रेनों के टायलेट को बायो टायलेट में तब्दील किया जाएगा। जिससे स्टेशन व ट्रैक गंदगी मुक्त हो जाएंगे।
ट्रैक को साफ सुथरा रखना रेलवे के लिए हमेशा से मुश्किल भरा काम रहा है। इसके लिए बड़ी संख्या में सफाई कर्मियों को लगाए जाने के बाद भी प्लेटफार्म और ट्रैकसाफ नहीं हो पाता है। रेलवे बोर्ड ने अब इसक ा तोड़ ढूंढ लिया है और सभी यात्री ट्रेनों में बायो टायलेट बनाए जाने की योजना तैयार की है। अभी तक शताब्दी, राजधानी सहित कुछ विशेष ट्रेनों में ही बायो टायलेट स्थापित हैं जबकि अन्य हजारों ट्रेनों में अभी भी शौचालय का मल ट्रैक पर ही गिरता है। ऐसे में जब ट्रेन के प्लेटफार्म पर खड़ी होती है तो गंदगी का अंबार हो जाता है। दुर्गंध से लोगों का उठना बैठना भी मुश्किल हो जाता है। रेलवे बोर्ड ने इस समस्या से निपटने के लिए सुपरफास्ट-एक्सप्रेस के साथ पैसेंजर ट्रेनों में भी बायो टायलेट स्थापित करने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया है। रेलवे सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य शेख मोहम्मद ने बताया कि रेलवे ने अक्टूबर माह तक सभी ट्रेनों को बायो टायलेट से लैस करने का लक्ष्य रखा है। आगे जितने भी कोचों का निर्माण किया जा रहा है उनमे बायो टायलेट स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही धीरे-धीरे पुराने कोचों में भी बायो टायलेट स्थापित किए जा रहे हैं। अभी तक इस क्षेत्र में लगभग 3000 कोचों में बायो टायलेट लगाए जा चुके हैं और तेजी से पुराने कोचों में बायो टायलेट स्थापित करने का कार्य चल रहा है।
ये है बायो टायलेट
इटावा। बायो टायलट सामान्य शौचालयों से बिल्कुल अलग होता है। ट्रेनों में बने सामान्य शौचालयों में मल सीधे ट्रैक पर गिरता है जिससे ट्रैक गंदगी से पटे रहते हैं। जब कि बायो टायलेट में मल टायलेट के ठीक नीचे लगे एक बाक्स में जाता है और पानी में तब्दील हो जाता है। इसके बाद यह पानी पूरी तरहे से बैक्टेरिया मुक्त होकर टैंक से बाहर निकल जाता है। ऐसे में ट्रैक पूरी तरह से गंदगी मुक्त बना रहेगा।