आईटीआई बाईपास रोड स्थित अपनी जमीन छोड़कर किसानों की जमीन पर नलकूप विभाग ने गलत तरीके से निर्माण कराया है। जांच के बाद एसडीएम ने अपने फैसले में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि नलकूप विभाग ने जहां निर्माण करवाया है वहां उसकी जमीन नहीं है। उसकी जमीन भू खंड संख्या 253 रकवा 0.081 हेक्टेयर है। उन्होंने कहा कि इसी जमीन पर नलकूप विभाग का कब्जा पाना सिद्ध होता है। गाटा संख्या 239 किसानों की जमीन है।
गौरतलब है कि नलकूप विभाग के गोदाम बनाने के बाद से ही किसानों ने विरोध शुरू कर दिया था। इसके बाद मामला लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव तक पहुंचा। उन्होंने एसडीएम सदर महेंद्र कुमार सिंह को इसकी जांच-पड़ताल करने के निर्देश दिए। सुनवाई करने के बाद उन्होंने फैसला दिया कि बाईपास रोड पर किसान मुनीम सिंह, माया देवी आदि की 0.5660 हेक्टेयर जमीन है। अभिलेखों में भी यह जमीन भूमिधरी दर्ज है।
एसडीएम ने आदेश में लिखा है कि इस जमीन से नलकूप विभाग कोई लेना-देना नहीं रहा है। नकलूप विभाग ने इस जमीन पर गलत तरीके से अपना गोदाम बना दिया है। एसडीएम के आदेश से किसानों को न्याय मिला है। किसानों का कहना है कि यह मामला कई सालों से चल रहा था। तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद भी कोई फैसला नहीं हो रहा था।
इस पर उन लोगों ने अपने सारे कागजात लोक निर्माण मंत्री को दिखाए। उनको बताया गया कि नलकूप विभाग की जमीन सिर्फ एक बीघे के करीब है। उसने हम लोगों की जमीन पर गोदाम बना दिया है। पांच बीघे के करीब जमीन भूमिधरी दर्ज है। उनके निर्देश पर एसडीएम ने मामले की सुनवाई करने के बाद हम लोगों के पक्ष में फैसला दिया है।
उधर, नलकूप विभाग के अफसर एक दूसरे पर अपनी जिम्मेदारी डाल रहे हैं। किस तरह से भूमिधरी पर गोदाम बना दिया, यह कोई बताने को तैयार नहीं है।
अशोक नगर निवासी विकास यादव ने भी आरटीआई के तहत नलकूप खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता से जानकारी मांगी तो उन्होंने जवाब दिया कि गोदाम का निर्माण पब्लिक नलकूप खंड ने कराया है। वही इसकी जानकारी दे सकता है।