इटावा। जिले में ऐसे भी जागरूक भक्त हैं जो महामारी से बचाव के साथ देवी आराधना का नया संदेश भी दे रहे हैं। प्रत्येक नवरात्र में कन्याभोज कराने वाले इन भक्तों ने इस बार कोरोना महामारी से बचाव के चलते कन्याभोज नहीं कराया। इन भक्तों ने कन्याभोज का पैसा गोशाला व अन्य जरूरतमंदों को दान करेेंगे।
शहर की बघेल कालोनी निवासी देवेंद्र सिंह बघेल ने बताया कि प्रत्येक नवरात्र में कन्याभोज कराते रहे हैं। इस बार महामारी के चलते सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है। इसलिए कन्याभोज नहीं कराया। बताया कि कन्याभोज पर खर्च होने वाली धनराशि गोवंश की सेवा में दान करेंगे। शिवा कालोनी निवासी संतोष शर्मा ने कहा कि कन्याभोज नवरात्र में सबसे पुण्य का कार्य है। इस बार की परिस्थितियों के अनुसार परिवार के सभी सदस्यों ने गरीबों को भोजन कराने के लिए दान दिया है। शहर के घटिया अजमत अली निवासी डा. उमेश सिंह तोमर ने बताया कि कन्या भोज में खर्च होने वाली धनराशि का गुप्तदान करेंगे। अलोपी बाग निवासी निहारिका शुक्ला ने बताया वह सती मोहल्ला में एक गरीब परिवार की घर जाकर मदद करेंगी। शिक्षिका ऋचा राय जिलाधिकारी कोरोना रिलीफ फंड, सुनीता मिश्रा सरकारी सहायता कोष, कल्पना कुमारी गोशाला, सीमा रानी जरूरतमंदों को देंगीं। इस तरह ग्राम बुधइया के श्रीमती मूर्ति देवी इंटर कालेज की प्रबंधक अनीता देवी सामुदायिक रसोई को 5100 रुपये देंगी। संवाद न्यूज उदी के अनुसार गांव मड़ैया करील गढ़ निवासी रमेश यादव ने बताया उन्होंने कन्या भोजन का पैसा काली माता के मंदिर में दान कर दिया है। उदी के सेवानिवृत्त फौजी शिशुपाल सिंह यादव ने कन्याभोज का पैसा सती माता मंदिर की दानपेटी में डाल दिया।
महागौरी की आराधना कर की सुख समृद्धि की कामना
इटावा। चैत्र नवरात्र की अष्टमी पर बुधवार को श्रद्धालुओं ने मां महागौरी की पूजा- अर्चना की। देवी दुर्गा के आठवें स्वरूप की मां महागौरी के रूप में आराधना की जाती है। ज्यादातर श्रद्धालुओं ने व्रत रखा और फल, फूल और मिष्टान अर्पित करने के बाद आरती की। परिवार समेत हवन कर घर- परिवार की सुख समृद्धि तथा कोरोना वायरस के संकट से देश के लोगों को बचाने की कामना की। संवाद
मंदिर में पुजारी ने की पूजा
उदी। स्थित सती माता मंदिर में परौली ग्राम अड्डा पूठन के महंत बाबा राम किशन दास ने बताया मंदिर में कोई भक्त नहीं आया। पार पट्टी क्षेत्र में नहर के किनारे स्थित दुर्गा माता मंदिर के महंत पाठक बाबा ने मंदिर में पूजा की। कोई भक्त मंदिर में नहीं आया। बाबा ने बताया हर साल करीब 10 झंडे चढ़ाए जाते थे। इस बार कोई भी भक्त नहीं आया।