मतदाता सूची में नाम बढ़वाने की प्रक्रिया गुरुवार से शुरू हो गई। यह प्रक्रिया 31 अक्तूबर तक चलेगी। कलक्ट्रेट स्थित जिला निर्वाचन कार्यालय, तहसील और ब्लॉक मुख्यालय से फार्म 6 प्राप्त करके सूची में नाम बढ़वाया जा सकता है। इसके लिए 31 अक्तूबर तक उम्र 18 वर्ष पूरी होनी चाहिए। इस प्रक्रिया के तहत तीन विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची अपडेट होगी।
इस संबंध में गुरुवार को प्रभारी डीएम/ सीडीओ पीके श्रीवास्तव ने सभी एसडीएम के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि मतदाता पुनरीक्षण अभियान के तहत युवाओं को अधिक से अधिक वोटर बनाया जाएगा। बताया कि 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं के अलावा यदि कोई अपना नाम सूची में बढ़वाना चाहेगा तो उसे दूसरे विधानसभा क्षेत्र में नाम न होने का प्रमाण पत्र देना होगा।
तीन विधानसभा क्षेत्रों में विशेष पुनरीक्षण अभियान चलेगा। सभी 1273 बूथों पर वोटर लिस्ट चस्पा होगी। जिसे वोटर अवश्य देख लें। जिससे यह पता लग सके कि उनका नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं। यदि नहीं है तो वह फार्म 6 भरकर नाम बढ़वा सकते हैं।
जिले में तीन विधानसभा क्षेत्र हैं। जिनमें इटावा, भरथना एवं जसवंतनगर शामिल हैं।
20 सितंबर- ग्राम सभा, स्थानीय निकाय की मदद से फोटोयुक्त मतदाता सूची का सत्यापन
31 अक्तूबर तक- मतदाता सूची पर दावों व आपत्तियों का निस्तारण
2 जनवरी 2017- फोटोयुक्त मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन
ये फार्म भरें
फार्म 6- वोटर लिस्ट में नाम बढ़वाने के लिए
फार्म 7- मतदाता सूची में नाम कटवाने के लिए
फार्म 8- मतदाता सूची में नाम, पिता का नाम, उम्र या फिर गलत फोटो को सुधरवाने के लिए
फार्म 8ए- एक ही विधानसभा में स्थाई या फिर अस्थाई पता बदलवाने के लिए
इस बार महिला वोटर बढ़ाने पर जोर है। जिले में अभी एक हजार पुरुष मतदाता के सापेक्ष 817 महिला वोटर है। जबकि यह संख्या यूपी के मानक के अनुसार 867 महिला वोटर की होनी चाहिए। इसी तरह वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने की दिशा में पहल होगी। लिहाजा महिला वोटरों को बढ़ाने पर जोर होगा।
- यह पद संवैधानिक होता है। कोई अधिकारी ठीक से काम न करें तो वह चुनाव आयोग से सीधे ट्रांसफर की सिफारिश कर सकते हैं।
- नेता-अफसर के गठजोड़ की रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजने का अधिकार होता है।
- चुनाव के संबंधित कामकाज के लिए सरकारी, गैर सरकारी भवन, भूमि और वाहन का अधिग्रहण कर सकते हैं।
- विभागाध्यक्ष या फिर कर्मचारी को खुद से अटैच करने का अधिकार होता है।
- चुनाव में बाधा डालने वाले अधिकारी, कर्मचारी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई का अधिकार भी होता है।
- जिला निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्टिंग सीधे चुनाव आयोग को होती है। राज्य सरकार या फिर उससे संबंधित किसी अधिकारी का आदेश मानने को बाध्य नहीं होते हैं।