विश्व सीओपीडी (क्रोनिक आब्स्ट्रेक्टिव पलमोनरी डिसीज) दिवस के मौके पर आयोजित गोष्ठी में डाक्टरों ने इससे बचाव व उपचार पर चर्चा की। डा. आर एस सिंह ने बताया की सीओपीडी पर सिर्फ नियंत्रण किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है। व्यायाम और ठंडी चीजों से परहेज कर इश बीमारी से बचा जा सकता है।
डा. आर एस सिंह के क्लीनिक पर आयोजित गोष्ठी में डा. सिंह ने बताया कि सीओपीडी सांस की गंभीर बीमारी है। जिसमें सांस की छोटी व बड़ी नलिकाओं में सूजन आ जाती हैं। जो उम्र बढ़ने के साथ ही बढ़ती है। देश में लगभग 12 प्रतिशत लोग सीओपीडी से ग्रसित हैं।
यह बीमारी लोगों को 40 की उम्र पूरी करने के बाद अपनी चपेट में लेती है। खास तौर से वह लोग इसकी चपेट में आते हैं, जिनके घर पर लकड़ी और केरोसिन व जैविक ईंधन से खाना बनाया जाता है। डा. सिंह ने बताया कि सीओपीडी की पहचान मरीज के लक्षणों और स्पाइरोमेट्री मशीन से की जाती है।
इस पर सिर्फ नियंत्रण किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है। सीओपीडी का इन्हेलर और दवाओं से इलाज किया जाता है। बीमारी से बचने के लिए लोगों को धूम्रपान ,वायु प्रदूषण से बचना चाहिए। ठंडी चीजों से परहेज और प्रतिदिन व्यायाम के साथ वैक्सीन से भी बचाव हो सकता है।