इटावा। गर्मी की तुलना में सर्दी में ब्रेन स्ट्रोक के रोगी तीन गुना बढ़ गए हैं। ब्रेन स्ट्रोक के रोगियों की नसें फटने वाले रोगी बढ़े हैं। अधिकतर रोगियों में ब्रेन स्ट्रोक का प्रमुख कारण अनियंत्रित ब्लड प्रेशर देखने को मिल रहा है। रोगी अपनी खुराक दुरुस्त नहीं कराते या फिर ब्लड प्रेशर सामान्य हो जाने पर दवाएं छोड़ देते हैं। इससे उनमें इस प्रकार की बीमारियों के पनपने की पूरी संभावना बन जाती है।
सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के न्यूरो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सजग गुप्ता ने बताया कि गर्मी के दिनों में औसतन पूरे महीने में पांच से 10 ब्रेन स्ट्रोक के मरीज आते थे, लेकिन सर्दी की शुरूआत होने ही इनकी संख्या में इजाफा हुआ है। अब हर दिन एक या दो मरीज विश्वविद्यालय पहुंच रहे है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। सर्दियों में ब्रेन स्ट्रोक के रोगियों में भी जटिलताएं बढ़ जाती हैं। जाेड़ों में ब्रेन हेमरेज के मामले अधिक हो जाते हैं। रोगियों के मस्तिष्क की नसें फट जाती हैं।