निवाड़ीकला। ब्लाक महेवा की गोशालाओं में गोवंश की संख्या को लेकर घालमेल चल रहा है। अभिलेखों में गोवंशों की संख्या कुछ दर्ज है जबकि हकीकत में संख्या कुछ और है। ब्लाक प्रशासन के मुताबिक बीते दिनों खाली कराई गई उरेंग गोशाला के गोवंशों को दूसरी गोशालाओं में शिफ्ट किया गया है। वहीं हकीकत में कुछ हुआ ही नहीं, जिम्मेदार कार्रवाई करने की बजाय एक दूसरे के ऊपर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
बरसात के दिनो में उरेंग गोशाला में जलभराव होने की बात कहते हुए पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान की मांग पर गोशाला के 80 गोवंश दूसरी गोशालाओं में भेज देने की मांग की गई। इस पहर ब्लाक अधिकारियों ने गोशाला के गोवंशों को भरईपुर, लुधियानी, अहेरीपुर और हलुहर्राजपुर की गोशाला में शिफ्ट करने के निर्देश जारी कर दिए। तीन पहले उरेंग गोशाला खाली करवा दी गई। दावा किया गया कि इस गोशाला के सभी गोवंश दूसरी गोशालाओं में भेज दिए गए हैं। जबकि हकीकत में इन गोवंशों को भगा दिया गया है। ये गोवंश किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने में जुटे है।
1- ग्रांम पंचायत अहेरीपुर में बनी गोशाला में मौजूदा वक्त में 145 गोवंश है। शनिवार तक उरेंग गोशाला से यहां एक भी गोवंश नहीं पहुंचाए था। पंचायत सचिव सौरभ का कहना है कि गोशाला में 145 गोवंश है। बाकी जानकारी करके पता करते है इससे अधिक जानकारी उन्हें नहीं है।
2- भरईपुर गोशाला में 59 गोवंश थे। शनिवार को इस गोशाला में 69 गोवंश थे। इस संबंध में पंचायत सचिव से बात नहीं हो सकी।
3- शनिवार को लुधियानी गोशाला में सिर्फ 65 गोवंश मिले। संचालक पंकज कुमार ने बताया कि उन्हें उरेंग गोशाला के 20 गोवंश प्राप्त हुए है। सचिव अनुज को भी गोशाला में गोवंश की सहीं संख्या पता नहीं हैं।
4- हलुहर्राजपुर गांव की गोशाला में शनिवार दोपहर में सिर्फ 17 गोवंश थे। प्रधान प्रतिनिधि रजनीश शर्मा ने बताया कि दोपहर में गोवंश चरने चले जाते है। वही पंचायत सचिव अनुज का कहना है कि उरेंग गोशाला के 15 गोवंश यहां भेजे गये है। इससे गोवंश की संख्या 55-60 हो गई होगी।
महेवा की गोशालाओं का संचालन करने वाले पंचायत सचिवों और प्रधानों को गोशाला में गोवंशों की संख्या कितनी है। इसकी जानकारी नहीं है, सभी संचालक तुक्केबाजी करते नजर आए। जिससे साफ जाहिर है कि प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना पर अधिकारी और कर्मचारी पलीता लगा रहे है ।
निवाड़ीकला निवासी बबलू दीक्षित का कहना है कि उरेंग गोशाला को चालू करवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगाने के बाद यह गोशाला शुरू हो पाई थी। बीते दिनों गोशाला को खाली करवा दिया गया। अन्य गोशालाओं में भेजने का दावा किया गया। अगर इस काम में भी लापरवाही बरती जा रही है तो यह किसानों के साथ सरासर धोखा है। नगला तुला निवासी परमात्मा शरण ने बताया कि उरेंग गोशाला के गोवंश यहीं खेतों में छोड़ दिए गए हैं। जो अब किसानों की फसल का नुकसान करने लगे है। परसों उनकी धान की नर्सरी गोवंश चट कर गए। गोशाला के गोवंश कहीं नहीं भेजे गए सब यहीं घूम रहे हैं।
अगर आंकड़ों की बात करे तो सिर्फ दो गोशालाओं में 35 गोवंश शिफ्ट हुए है। बाकी 45 गोवंश कहां गए यह कोई नहीं जानता। इसकी जानकारी न तो बीडीओ को है और न ही पंचायत सचिव को।
लुधयानी गोशाला में 20 गोवंश उरेंग से शिफ्ट किए गए है। इसके अलावा उन्हें जानकारी नहीं है। डॉ.सोमेश निगम, पशुचिकित्साधिकारी
जिन गोशालाओं में उरेंग गोशाला के गोवंश शिफ्ट किए गए हैं। उनके सचिवों की जिम्मेदारी है कि वह उनकी व्यवस्था कराएं। लापरवाही होने की जानकारी मिली है, इसकी जांच कराएंगे और अगर जरा सी भी खामी मिली तो कार्यवाई तय है। - सतीश पांडेय, बीडीओ महेवा