वर्ल्ड एनेस्थिसिया डे में भाग लेते एनेस्थिसिया विशेषज्ञ।
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सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के एनेस्थीसिया विभाग एवं इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट सैफई सिटी ब्रांच ने मंगलवार को 171वां विश्व एनेस्थीसिया दिवस मनाया।
मुख्य अतिथि आरएमएलए लखनऊ निदेशक प्रो. दीपक मालवीय ने बताया कि पहली बार सर डब्लू टी मार्ट ने 1846 में इथर को जनरल एनेस्थीसिया के रूप में प्रयोग किया। इसके बाद चिकित्सा जगत में क्रांतिकारी बदलाव आया। 1846 से पूर्व मरीज की सर्जरी कठिन कार्य हुआ करती थी।
कुलपति डा. प्रभाकर ने बताया कि चिकित्सा जगत में एनेस्थीसिया का प्रवेश किसी चमत्कार से कम नहीं था। इसके आने के बाद लंबी सर्जरी, जटिल सर्जरी व दर्द रहित सर्जरी कर पाना बेहद आसान हो गया। इथर के पूर्णत्या सुरक्षित प्रयोग होने से सर्जरी में व्यापक बदलाव आया है। अब मरीज को सर्जरी के दौरान पीड़ा नहीं होती है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. विरेंद्र शर्मा ने कहा कि चिकित्सा जगत में एनेस्थीसिया के एडवांस विकास का ही परिणाम है कि आज कोई मरीज अपने ही आप्रेशन को आसानी से मानिटर पर देख सकता है। इसके अतिरिक्त एनेस्थीसिया से कैंसर और अन्य रोगों की सर्जरी में दर्द को कम करने में किया जा रहा है।
डॉ. उषा शुक्ला ने बताया कि आज एनेस्थीसिया पूरी तरह से एक सुपर-स्पेशिलिटी ब्रांच के रूप में स्थापित है। इसमें निरंतर शोध जारी है। विश्वविद्यालय का एनेस्थीसिया विभाग विभिन्न प्रकार के क्रिटिकल केयर के साथ आपरेशनों और उसके बाद मरीजों की व्यापक निगरानी में विशेष योगदान दे रहा है।
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि गवर्निंग काउंसिल मेंबर आईएसए डॉ. विरेंद्र शर्मा, आरएमएलए लखनऊ विभागाध्यक्ष डॉ. कर्नल आरके त्रिपाठी, डॉ. राजन भटनागर, डॉ. भारत भूषण, डॉ. धीर सिंह रहे।