कई महीनों से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों को लेकर बरती जा रही हीलाहवाली आखिरकार समाप्त हो गई। जांच के नाम पर आवेदनों को लंबित रखा जा रहा था। ‘अमर उजाला’ ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
इस पर प्रभारी ईओ/ एडीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने गंभीर रुख अपनाते हुए संबंधित जांचकर्ताओं के पेंच कसे। इसके बाद से लंबित आवेदन निस्तारित किए जाने लगे। इस पर कई परेशान लोगों ने ‘अमर उजाला’ को थैक्स कहा।
ॉगौरतलब है कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए अब ऑनलाइन आवेदन की सुविधा मुहैया है। जो व्यक्ति ये प्रमाणपत्र बनवाना चाहते है, उसे नगरपालिका के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। वह किसी भी लोकवाणी या जनसेवा केंद्र पर जाकर संबंधित डाक्यूमेंट देकर आवेदन करा सकता है।
ऑनलाइन आवेदन अपलोड होने के बाद यह नगरपालिका में डाउनलोड कर लिया जाता है। जहां आवेदनों की जांच करवाई जाती है। इसके लिए संबंधित कर्मचारियों को क्षेत्रवार आवेदन सुपुर्द कर दिए जाते हैं।
उनकी जांच रिपोर्ट लगते ही लोकवाणी या जनसेवा केंद्र से प्रमाणपत्र हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन नगर पालिका में जांच के नाम पर आवेदनों को लंबित रखा गया था। इसमें गत फरवरी तक के आवेदन शामिल थे। इससे लोग परेशान हो रहे थे और चक्कर काटने पर मजबूर हो रहे थे।
‘अमर उजाला’ ने लोगों की इस परेशानी को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर को प्रभारी ईओ/एडीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने गंभीरता से लेते हुए लंबित आवेदनों की जानकारी संबंधित जांचकर्ताओं से की और उन्हें तत्काल जांच कर रिपोर्ट लगाने के सख्त निर्देश दिए।
लिहाजा शनिवार से लोगों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र मिलना शुरू हो गए। ‘अमर उजाला’ के प्रयास पर कई लोगों ने फोन कर शुक्रिया अदा किया।