बाबू ज्योति शंकर दीक्षित। संवाद
- फोटो : ETAWAH
इटावा। क्रांतिवीर बाबू ज्योति शंकर ने देश को स्वाधीनता दिलाने के लिए अंग्रेजों से लोहा लिया और काकोरी कांड में जेल भी गए। उन्होंने पेंशन लेने से इंकार कर दिया था। सेनानी ने आजादी की जंग में ब्रिटिश सरकार की कई यातनाएं झेलीं, लेकिन अपने इरादों से डिगे नहीं।
बाबू ज्योति शंकर दीक्षित और मुकुंदी लाल को काकोरी कांड में 9 अगस्त 1925 को गिरफ्तार किया गया। ये लोग सचींद्र नाथ सान्याल द्वारा स्थापित हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के बैनर तले अंग्रेजी हुकूमत से लोहा ले रहे थे। बाद में बाबू ज्योति शंकर दीक्षित कांग्रेस के साथ हो लिए। जल्दी उनकी गिनती कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में होने लगी। लालपुरा मोहल्ला निवासी उनके पौत्र भारतीय स्टेट बैंक में शाखा प्रबंधक प्रतिमा शंकर दीक्षित बताते हैं कि बाबू जी का मानना था कि आजादी के लिए आवाज उठाना नैतिक कर्तव्य था। इसका कोई प्रतिदान नहीं हो सकता। आज हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे है। ऐसे में बाबू ज्योति शंकर दीक्षित को याद करना बहुत जरूरी है।