मौलाए कायनात हजरत अली की पैदाइश की खुशी में सैदबाड़ा स्थित शरीफ मंजिल में महफिल का आयोजन राहत अकील शक्कन की तरफ से किया गया। महफिल की सदारत इमाम शिया जामा मस्जिद मौलाना सैयद अनवारुल हसन जैदी ने की।
महफिल में तस्लीम रजा ने कहा भागो भागो की सदा आती थी हर एक जंग में...। सलीम रजा ने कहा हैदर की विलादत के सबब कहना पड़ेगा, आबाद हुआ खाना ए रब कहना पडे़गा...। मौलवी ताबिश रिजवी ने कहा खुशी है आज दो आलम में जिसके आने की, अली की मां को खुदा भी सलाम करता है...। अहमद एडवोकेट ने कहा अली के इल्म को इस तरह समझ ले ये दुनियां...। तनवीर हसन ने कहा मुश्किलों से बचते हैं हम अली कहकर, ये नबी का नारा है आप कौन होते हैं...।
अयाज हुसैन बबलू ने कहा जहनों से अपने दूर ये तीरगी कर लो, नादे अली से दिलों में रोशनी कर लो। हसनैन वारसी शिकोहाबाद ने कहा काबे में मोहम्मद का जाना ये बताता है, मिलने को इमामत से बेचैन नवूवत है। तौहीद शिकोहाबाद ने कहा अली के चाहने वाले अजीब होते हैं, इस लिए वो अली के करीब होते हैं।
सलमान रिजवी ने कहा कब्र में जब करने आयें फरिश्ते तुमसे सवाल, कोई जवाब न देना बस अली अली कहना। सूफी अब्दुल सत्तार ने कहा है तमन्ना है कि मदीने की जियारत हो जाय, आपके दर का भिखारी हूं शहंशाहे उमम। शावेज नकवी ने कहा ये उम्मते सरकार मिटी है न मिटेगी, इस आखिरी उम्मत के निगेहबां हैं अली।
मौलाना सैयद अनवारुल हसन जैदी ने मौलाए कायनात के जीवन पर रोशनी डालते हुए कहा कि अली 13 रजब को खाने काबा में पैदा हुए। अली को नमाज रोजा पसंद था। अंत में राहत अकील की ओर से मौला अली की नज्र का इंतजाम किया गया।
महफिल में अली मेंहदी, नजमुल हसन, तहसीन रजा, शावेज नकवी, गुलामुस सईदैन, सईद नकवी, मून हसन, अरशद मरगूब, शानू, आलिम रिजवी, राहत हुसैन, सोनू, जीशान, शयान, शोजब, आतिफ, मिंटू, नफीस आब्दी, बाबू, अली साबिर, शाद, टी एच रिजवी, शादाब, आमिल रिजवी, शारिब, आरिफ, जुनैद, मोहम्मद मियां सहित सैकड़ों लोगों ने शिरकत कर मौला अली की पैदाइश का जश्न मनाया।