बाजार में स्वर्ण आभूषणों की खरीददारी करती महिलाएं।
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इटावा। अक्षय तृतिया पर्व शहर भर में श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। श्रृद्धालुओं ने घर में भगवान विष्णु, गणेश-लक्ष्मी व कु बेर की आराधना की। हालांकि इस बार बाजार में अक्षय तृतिया पर बाजार में ज्यादा रौनक नहीं रही लेकिन फिर भी सोने के आभूषण और सिक्के की खरीदने के लिए लोग बाजार पहुंचे और खरीददारी की। श्रद्धालुओं ने इस पावन मौके पर दान पुण्य भी किया।
अक्षय तृतिया का पावन पर्व वैशाख के शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इसी दिन वेद व्यास ने महाभारत की रचना शुरू की साथ ही गंगा भी इसी दिन स्वर्ग से धरती पर उतरी और शिवजी ने उन्हें अपनी जटाओं में समाकर पृथ्वी लोक पर उतारा। इसी पावन दिन ही देवी अन्नपूर्णा का भी जन्म बताया गया है।
अक्षय एक संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ सुख समृद्धि और सफलता है। माना जाता है कि इस दिन जो दान पुण्य करता है उसे ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इन्हीं मान्यताओं को लेकर सोमवार को श्रद्धालुओं से सुबह स्नान ध्यान कर घर में पूजा अर्चना की और इसके बाद बाजार में खरीददारी के लिए निकले। लोगों ने बाजार पहुंचकर सोने के आभूषणों की खरीददारी की। इसके साथ ही लोगों ने घर में पूजा अर्चना करने के बाद दान पुण्य किया। सराफा व्यापारियों ने भी इसके लिए विशेष तैयारी कर रखी थी और नई डिजाइन के आभूषण तैयार कराए थे लेकिन व्यापारियों के अनुसार सोमवार को अपेक्षा के अनुरूप बिक्री नहीं हुई।