खेत में फसल देखने सीडीओ राजागणपति आर और जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह पहुंचे।
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इटावा। परंपरागत खेती छोड़कर चकवा बुजुर्ग गांव के दो किसानों ने शिमला मिर्च की खेती कर अपने साथ 12 और परिवारों की जिंदगी संवार दी है। ये खेती करके प्रति वर्ष करीब डेढ़ लाख तक की आय करने के साथ दूसरे को रोजगार भी दे रहे हैं। इन उन्नतिशील किसानों की फसल देखने सीडीओ और कृषि अधिकारी खेत पर पहुंचे थे।
विकास खंड क्षेत्र के ग्राम चकवा बुजुर्ग के किसान आलोक कुमार एवं पिता जगदीश चंद्र यादव ने 10 एकड़ में शिमला मिर्च की खेती की है। किसानों ने बताया कि एक एकड़ खेती में 50 हजार की लागत आती है और 2 लाख से ढाई लाख तक आमदनी हो रही है। 50 बीघा जमीन में लगभग 12 लोगों को रोजगार मिल रहा है। किसानों ने बताया कि मल्चिंग विधि से शिमला मिर्च तैयार की जाती है। आसपास के किसानों को भी जानकारी दी जा रही है। इस तरीके से पैदावार करने से आधी लागत की बचत हो रही है। दोनों किसानों के पास अपनी जमीन 25 बीघा जमीन है। इसके अलावा 25 बीघा जमीन तीन हजार रुपये प्रति बीघा पर ले रखी है। शिमला मिर्च का बीज खुद ही बना लेते हैं जो जालना महाराष्ट्र में जाकर सीख लिया। उसी तरीके से पैदावार करने लगे।
जगदीश चंद्र ने बताया सीडीओ राजा गणपति आर, जिला उद्यान अधिकारी और जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह भी खेत देखने पहुंचे थे। किसान जगदीश चंद्र अपने खेतों में शिमला मिर्च व खीरा की फसल पैदा करके लाखों रुपये सालाना की आमदनी बढ़ाई है।
खेत में लगे पौधों को जमीन को चारों तरफ से प्लास्टिक फिल्म के द्वारा सही तरीके से ढकने की प्रणाली को प्लास्टिक मल्चिंग कहते हैं। इस तकनीक से खेत में पानी की नमी को बनाए रखने और वाष्पीकरण रोका जाता है। इससे पौधों की जड़ों का विकास अच्छा होता है। इसके साथ ही ये तकनीक खेत में मिट्टी के कटाव को भी रोकती है। खेत में खरपतवार को होने से बचाव भी होता है।