इटावा। सूत मिल कालोनी में मंगलवार को पुलिसकर्मियों ने पहुंचकर यहां रह रहे लोगों को सात दिन में कालोनी खाली करने का अल्टीमेटम दिया। कालोनी में पुलिस देखकर यहां रहने वाले परिवाराें में खलबली मच गई।
मंगलवार को सूत मिल कालोनी पहुंचे एक दरोगा व दो सिपाहियों ने लोगों को कालोनी खाली करने को नोटिस तालीम कराते हुए सात दिन का अल्टीमेटम दिया। अब डरे सहमे कालोनी के बाशिंदों को उनके बकाया भुगतान की संभावना क्षीण होती दिख रही है। उनका कहना है कि कालोनी खाली होने के बाद उनकी कौन सुनेगा।
मालूम हो कि करीब बीस वर्षों से जिले की सूत मिल को बंद है। मिल परिसर में बनी कर्मचारी व लेबर कालोनी में मिल में कार्य करने वालों कर्मचारियों के परिवार लंबे समय से रह रहे हैं। इधर मिल के महाप्रबंधक एन के मिश्रा ने कालोनी खाली करने का फरमान सुना दिया। एक मई को यहां के निवासियों ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई थी। तब डीएम ने भी इस मामले में हाथ खड़े कर दिए थे।
गरीबों के साथ हो रहा अन्याय
कालोनी में रहने वाली वीरवती, सावित्री देवी, राजू रावत, वीरेंद्र लाला, मनीष यादव का कहना है कि सरकार व अधिकारी गरीबों के साथ अन्याय कर रहे हैं। पहले सूत मिल बंद करके गरीबों को भुखमरी की कगार पर धकेल दिया गया। बाद में उनके वेतन, फंड आदि का बकाया भुगतान नहीं किया गया। जैसे-तैसे हम लोग परिवारों का भरणपोषण कर रहे हैं। अब सिर पर जो छत है उसे भी छीनने की कोशिश की जा रही है। सभी ने कहा कि पहले बकाया भुगतान कराया जाए बाद में छत खाली करने के लिए उन पर दबाव बनाया जाए।