इटावा। किसानसभा के प्रांतीय कोषाध्यक्ष मुकुट सिंह ने पत्रकार वार्ता में किसानों की भूमि रेलवे के नाम दर्ज करने पर आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि किसानों को मुआवजा दिए बगैर व बिना सहमति के दो दिन में गैरकानूनी और एकतरफा ढंग से खतौनी से किसानों के नाम खारिज कर रेलवे ने नाम भूमि दर्ज कर दी गई। प्रशासन का यह कृत्य निंदनीय है। किसान झुकने वाले नहीं है और न्याय के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
उक्त भूमि अधिग्रहण के मामले दीवानी कोर्ट और आयुक्त कानपुर के समक्ष लंबित है। 30 मार्च को किसानों की सभी मांगों से डीएम को अवगत कराया था। उन्हीं के माध्यम से ज्ञापन की प्रति मुख्यमंत्री को भेजी थी। किसानों को आशा थी कि उन्हें न्याय मिलेगा किंतु एकतरफा दाखिल खारिज कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि दाखिल खारिज की कानूनी प्रक्रिया, 35 दिनों के नोटिस, जवाब आदि का उल्लंघन कर दो दिनों में दाखिल खारिज कर तहसीलदारों के आदेश ने किसानों का विश्वास तोड़ा है। संघर्ष समिति के अध्यक्ष विशंभर सिंह ने कहा कि हम रेल लाइन के विरोधी नहीं है। हम तो अपनी रोजी रोटी की लड़ाई लड़ रहे हैं। हम न्यायपूर्ण लड़ाई जारी रखेंगे। शीघ्र ही इटावा कचहरी पर किसान पंचायत होगी। वार्ता के दौरान किसान सभा के मंत्री डा. संतोष गोयल, किशनकुमार दुबे, बाबा हुकुम सिंह, बाबा शिवनारायण शर्मा, रामजीत, मानसिंह, जिला मंत्री रामप्रकाश और संयुक्त मंत्री संतोष शाक्य मौजूद रहे।