इटावा। बॉलीवुड के नामचीन गायक रूप कुमार राठौर और उनकी पत्नी सोनाली राठौर ने शनिवार की रात इटावा महोत्सव को चार चांद लगा दिए। नगमों-गजलों की ऐसी झड़ी लगाई कि रात के आखिरी पहर तक श्रोता पंडाल में डटे रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत डीएम डॉ. नितिन बंसल और एसएसपी डॉ. राकेश सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित करके की। इसके बाद सजी सुरों की महफिल में राठौर दंपति ने इटावा महोत्सव की शाम यादगार बना दी। कार्यक्रम में रूप कुमार ने कुछ अपने तो कुछ पब्लिक की डिमांड पर गाने सुनाए। बार्डर फिल्म का गीत संदेशे आते हैं... सुनाकर तालियां बटोरीं। रब ने बना दी जोड़ी फिल्म का गीत तुझमें रब दिखता है यारा मैं क्या करूं... सुनाकर युवाओं युवाओं का दिल जीत लिया। गुनाह फिल्म का गीत रूठकर हम उन्हें भूल जाने लगे वो हमें और भी याद आने लगे... सुनाकर पंडाल के माहौल में रस भर दिया। वह एक के बाद एक गीत पब्लिक को सुनाते रहे।
मंच पर उनकी पत्नी सोनाली राठौर के गीतों ने भी समा बांधा। गीत मुझे इश्क का कलमा याद रहा..., आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे... आदि जैसी धमाकेदार प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में एडीएम ज्ञानेंद्र सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट ईश्वरचंद्र, एसडीएम सदर महेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम ताखा सुरेशचंद्र शर्मा, एसडीएम जसवंतनगर हंसराज यादव, एसडीएम चकरनगर प्रमोद कुमार के साथ ही नुमाइश कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम संयोजक कुमार कांत दीक्षित ने सभी का आभार जताया। इस दौरान राठौर दंपति को नुमाइश कार्यकारिणी के द्वारा सम्मानित किया गया। उन्हें हमेशा इटावा महोत्सव की याद दिलाता रहे ऐसा प्रतीक चिह्न भेट किया गया।
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गुरुकुल की तर्ज पर म्यूजिक स्कूल की है ख्वाहिश
मशहूर गायक रूप कुमार राठौर व सोनाली राठौर ने कार्यक्रम से पहले पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने अपना सपना भी बताया। कहा कि देश में हुनर की कमी नहीं है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड पर कई लोग गीत गाते मिलते हैं। उनके पास प्लेटफार्म न होने से उनका हुनर आगे नहीं बढ़ पाता है। उनका सपना है कि ऐसा म्यूजिक स्कूल बनाएं जो गुरुकुल की तरह हो और गरीबों को फ्री में संगीत की शिक्षा मिले। ईश्वर चाहेगा तो यह सपना वे एक दिन जरूर पूरा करेंगे। राठौर दंपति ने बताया कि चार दिसंबर को उनकी शादी के 25 वर्ष पूरे होंगे। इस मौके पर वह अपना एलबम ‘जिक्र’ रिलीज करेंगे। उन्होंने कहा कि पुराने गानों का दौर आज भी है और कभी खत्म नहीं होगा। हिंदुस्तान में हिंदी भाषा से लोग गुरेज करते हैं, जबकि विदेशों में प्रेम करते हैं। नई फिल्मों में ऑर्ट की कमी है। फिल्म और गाने तीन दिन में फ्लॉप हो जाते हैं। कुछ नए लड़के गायिकी के क्षेत्र में आए हैं, लेकिन उन्हें भावनाओं से प्रेम कम है।