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बीस हजार बढ़े, 22 हजार घट गए वोटर

Tue, 25 Nov 2014 05:30 AM IST
Etawah
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इटावा। मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान में जिले में करीब 20 हजार नए वोटर बढ़े हैं। हालांकि करीब 22 हजार नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। ये वे मतदाता है जिनकी मौत हो गई या उनका अतापता नहीं है। बीएलओ स्तर से भरे गए फार्म मतदाता पंजीकरण केंद्रों से आयोग की साइट पर अपलोड किए जा रहे हैं। यह कार्य 24 नवंबर तक होगा। पुनरीक्षण कार्यक्रम में यह पता चला है कि जिले का जेंडर रेसियो अभी भी प्रदेश के औसत जेंडर रेसियो से कम बना हुआ है।
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मतदाता सूची पुनरीक्षण का यह अभियान 15 अक्तूबर से 20 नवंबर तक चला था। आयोग ने उन युवाओं को वोटर बनने का अवसर दिया, जिनकी आयु एक जनवरी 2015 को 18 वर्ष पूर्ण हो रही है। एक महीना 5 दिन तक चले इस अभियान में डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम सूची से काटने पर विशेष ध्यान दिया गया। ये वे थे जिनकी या तो मृत्यु हो चुकी है या फिर वह किसी अन्यत्र जगह पर रहने लगे हैं। इस अभियान से पूर्व 15 अगस्त 2014 को प्रकाशित मतदाता सूची में जिले की तीन विधानसभा क्षेत्रों में कुल 11,21,654 मतदाता थे। इनमें 6,18,437 पुरुष व 5,03,217 महिला मतदाता शामिल हैं। हाल के अभियान में फार्म 6 के जरिए करीब 20 हजार मतदाता बढ़े हैं। इनमें 18419 नामों को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है।
वहीं मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए करीब 22 हजार फार्म-7 भरे गए हैं। इनमें 21542 नाम अपलोड किए जा चुके हैं। अपलोडिंग के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट 24 नवंबर तक खुली रहेगी। तहसील स्थित मतदाता पंजीकरण केंद्राें से अपलोडिंग का काम अंतिम चरण में है। जाहिर है कि मतदाता पुनरीक्षण के इस अभियान में वोटर बढ़ने की जगह घटे अधिक हैं। ऐसे में मतदाता सूची में वोटरों की संख्या बढ़ने की बजाय घटेगी। यहीं नहीं जिले में महिला वोटरों की संख्या भी अपेक्षित नहीं है। प्रति हजार पुरुष मतदाताओं पर महिलाओं की संख्या का औसत अनुपात कम बना हुआ है। प्रदेश का यह जेंडर रेसियो जहां 867 है, वहीं जिले में यह अभी 814 पर टिका है।
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एडीईओ पीसी तिवारी ने बताया कि अपलोडिंग पूरी होने पर बढ़े और घटे मतदाताओं की सही संख्या स्पष्ट हो जाएगी। डुप्लीकेट वोटरों की संख्या को दृष्टिगत रखते हुए आयोग के निर्देश पर ऐसे नामों को मतदाता सूची से हटाया गया है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या अब जिले में निवास नहीं करते। हालांकि घर-घर सर्वेक्षण करने गए बीएलओ की मानें तो लोग मृतकों का नाम कटवाने से परहेज करते हैं। उनके द्वारा फार्म-7 पर हस्ताक्षर करने में आनाकानी की जाती है।
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