इटावा। 302 कि मी लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के शिलान्यास का मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही विरोध शुरू हो गया है। विरोध भी कांग्रेस ने किया है जो सरकार की समर्थक मानी जाती है। ताखा तहसील के किसानों क ो भी सैफई जितना मुआवजा दिए जाने की मांग क ो जिला कांग्रेस अध्यक्ष के नेतृत्व में काली पट्टियां बांध कर विरोध प्रकट किया गया। कांग्रेस ने साफ कहा है कि जब तक किसानों को मुआवजा देने में इंसाफ नहीं किया जाता तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। किसानों का पक्ष लेेकर कांग्रेस तीन महीने से आंदोलनरत है।
जिला कांग्र्रेस अध्यक्ष उदयभान सिंह ने बताया कि जिले के 62 कि मी लंबे क्षेत्र में करीब चार हजार बीघा जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। आगरा- लखनऊ एक्सप्रेस वे में तीन तहसीलों इटावा, ताखा, सैफई के किसानों की जमीन जा रही है। सैफई तहसील के किसानों को 1.20 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा दिया जा रहा है जबकि ताखा क्षेत्र के किसानों को बहुत कम दिया जा रहा है। नाइंसाफी यह है कि ताखा क्षेत्र के सर्कि ल रेट कम कर दिए गए हैं। सरकार की ओर से किसानों को एक्सप्रेस-वे से फायदा होने की बात कही जा रही है। जबकि एक्सप्रेस-वे पर जिले में दो स्थानों पर चढ़ने के लिए रास्ता मिलेगा। इस रास्ते से ट्रैक्टर और बैलगाड़ियां नहीं चढ़ सकेंगी।
पूर्व जिलाध्यक्ष सूरज सिंह यादव ने बताया कि एक्सप्रेस-वे के नाम पर किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है। इस परियोजना पर करीब 15000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे है। निर्माण करने वाली कंपनी को 500 करोड़ का भुगतान कर दिया गया है। जबकि नियमानुसार काम होने के बाद ही पेमेंट किए जाने का प्रावधान है। सैफई के बराबर ताखा के किसानों को मुआवजा मिले तो वह किसी प्रकार गुजारा कर सकता है। विरोध करने वालों में पूर्व शहर अध्यक्ष फजल यूसुफ, धर्मराज वर्मा, कोमल सिंह कुशवाह, प्रेमनारायण दोहरे, संजय दोहरे, संश्लेष चंद्र पोरवाल, सीताराम जादौन, प्रेम किशोर द्विवेदी, मलिखान सिंह यादव, सरवर अली, यशप्रताप यादव, आशुतोष दीक्षित, सुनील पालीवाल, रामसेवक जाटव, सुशील कुमार, शमशुद्दीन खां, संजीव पटेल आदि प्रमुख रहे।