इटावा। जिला लघु उद्योग केंद्र ने करीब इक्कीस वर्ष पहले शहर से सटे सराय ऐसर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना बनाई थी। योजना के तहत 45 भूखंडों का आवंटन भी किया गया, लेकिन आज तक औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया। रसूखदार उद्यमियों ने भूखंड तो आसानी से हासिल कर लिए, लेकिन उद्योगों को विकसित आज तक नहीं किया। चार यूनिट हो छोड़कर आज भी औद्योगिक क्षेत्र वीरान और उजाड़ पड़ा हुआ है। रसूखदारों की जगह अगर विभाग जरूरतमंदों को भूखंड आवंटित करता तो शायद यहां भी महानगरों की तर्ज पर औद्योगिक इकाइयां विकसित होतीं और जिले के बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलता।
इटावा जिला आज की तारीख में उद्योगविहीन है। इस कारण से जिले में बेरोजगारों की लंबी फौज है। बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से शासन के निर्देश पर जिला लघु उद्योग केंद्र ने वर्ष 1992 में जिले में औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने का योजना तैयार की। योजना के तहत सराय ऐसर में जगह निर्धारित की गई। वर्ष 1993 में यह जगह जिला उद्योग केंद्र को औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए हैंडओवर हो गई। औद्योगिक क्षेत्र में कुल 130 भूखंड तैयार किए गए। 85 भूखंड उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम ने वेयर हाउस बनाने के लिए ले लिए। शेष भूखंड औद्योगिक इकाई लगाने के लिए उद्यमियों को आवंटित कर दिए गए। बाद में उस वक्त का आवंटन रद्द करके वर्ष 2000 में नए सिरे से भूखंडों का आवंटन की प्रक्रिया शुरू हुई।
औद्योगिक क्षेत्र में अनुसूचित जाति कोटे के चार भूखंड छोड़कर 41 भूखंडाें का आवंटन हो चुका है। बावजूद इसके अभी तक यहां सिर्फ तीन-चार यूनिट ही लगी हैं, जिनमें सीमेंट के पाइप और सीमेंट की ईंट की फैक्ट्री शामिल हैं। इसके अलावा किसी ने भी अपने फैक्ट्री आदि यहां नहीं लगाई है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन लोगों को भूखंड आवंटन किए गए उनमें ज्यादातर राजनीतिक रसूखदार हैं। अगर जरूरतमंद उद्यमी को विभागीय अफसर यहां जगह देते तो आज फैक्ट्रियां लग चुकी होतीं।
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रियायती दरों पर मिलती है जमीन
अब सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर रसूखदारों ने भूखंड क्यों आवंटित कराए। विभागीय जानकारी के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र में जमीन रियायती दरों पर मिल जाती है। जबकि बाजार भाव जमीन का कई गुना अधिक होता है। जमीन का आवंटन होने पर एकमुश्त पैसा नहीं है तो कोई बात नहीं। कुल कीमत का दस प्रतिशत रुपया जमा करके शेष पैसा वार्षिक किस्तों में सहूलियत के हिसाब से दिया जा सकता है। ब्याज भी करीब पौने आठ प्रतिशत के आसपास ही देना पड़ता है।
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रसूख के आगे नहीं होती कार्रवाई
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र में जमीन का मालिक विभाग ही होता है। सिर्फ 99 वर्ष के पट्टे पर जमीन दी जाती है। अगर कोई उद्यमी निर्धारित समय सीमा में यूनिट स्थापित नहीं करता है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका आवंटन रद्द हो सकता है। सराय ऐसर में आज तक यूनिट स्थापित नहीं हुईं और विभाग के अफसर कार्रवाई के नाम पर भी लाचार दिखाई दे रहे हैं।
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विभाग भी है जिम्मेदार
औद्योगिक इकाई विकसित न होने के पीछे उद्यमी सीधे तौर पर जिला लघु उद्योग केंद्र को जिम्मेदार ठहराते हैं। जिनके नाम जमीन का आवंटन है उनका कहना है कि विभाग की ओर से न तो जलनिकासी की व्यवस्था की गई है और न ही लाइट की। सुरक्षा की भी कोई व्यवस्था नहीं है। अव्यवस्थाओं के चलते ही जमीन आवंटित होने के बाद भी लोग यूनिट नहीं लगा सके हैं।
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यूनिट स्थापित न होने पर कई उद्यमियों को नोटिस भेजे गए हैं और कई का आवंटन भी निरस्त किया गया है। मौजूदा समय में 16 भूखंडों में यूनिट शुरू होने की जानकारी है। शेष जगह में भी इकाई शुरू हो जाएं इसके प्रयास किए जा रहे हैं। -मनीष चौधरी, सहायक प्रबंधक जिला उद्योग केंद्र
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औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए 15 साल से जिला उद्योग बंधु की बैठकें हो रही हैं। आवंटन में पारदर्शिता अपनाने के साथ ही उन लोगों का आवंटन निरस्त किया जाना चाहिए, जिन्होंने वर्षों से जमीन लेने के बाद भी उद्योग स्थापित नहीं किया। विभाग ने जरूरतमंदों को भूखंड आवंटन न करके रसूखदारों को आवंटित किए। इसी कारण से उद्योग आज तक स्थापित नहीं हो पाए। हमने बैठकों में विरोध किया तो उद्योग बंधु की बैठक में अफसरों ने हमें और संगठन के पदाधिकारियों को बुलाना ही बंद कर दिया।
-अनंत प्रताप अग्रवाल, जिलाध्यक्ष व्यापार मंडल