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बिन बिजली शोपीश बने है नलकूप

Tue, 23 Sep 2014 05:31 AM IST
Etawah
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इटावा। जिले में घोषित-अघोषित कटौती क ो लेकर पब्लिक में नाराजगी बढ़ती जा रही है। शहर में तो व्यापार कारोबार प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में भी कटौती के कारण किसानों का बुरा हाल है। बरसात न होने के कारण खरीफ की फसल तो सूख ही चुकी है। बिजली से चलने वाले नलकूपों के शोपीस बन जाने से किसान रबी की फसल की भी तैयारी नहीं कर पा रहा है। पारपट्टी क्षेत्र का तो और भी बुरा हाल है। बिजली का यही हाल रहा तो गांव से पलायन शुरू हो जाएगा। विरोधी दल सरकार को घेरने के लिए रणनीति तैयार करने लगे हैं।
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जुलाई के प्रारंभ में बरसात होने की उम्मीद में किसानों ने धान तथा बाजरा, ज्वार, मूंग तथा उड़द की फसल बो ली थी। बादलों के दगा दे जाने से धान की 75 फीसदी फसल चौपट हो चुकी है। अन्य फसलों क ो किसान किसी तरह नलकूपों से सिंचाई कर जीवित रखे हुए है। डीजल महंगा होने के कारण फसल की लागत में इतनी ज्यादा वृद्धि हो गई है कि खर्चा निकलना भी मुश्किल है। कुछ फसलाें को अभी भी सिंचाई की आवश्यकता बनी हुई है। मगर अब बिजली की अघोषित कटौती शुरू हो जाने से किसानों क ो फसल बचाने की चिंता सताने लगी है। खरीफ की फसल तो चौपट हो ही गई है, अब किसान रबी की फसल पर उम्मीद लगाए बैठा है, लेकिन अब घोषित के साथ अघोषित कटौती से किसानों क ो दो तरफा नुकसान हो रहा है। भरथना, सैफई और ताखा ब्लाकों में नहरें चलने से 20 फीसदी तक फसलें जिंदा हैं, लेकिन सबसे बुरा हाल पारपट्टी क्षेत्र का है।
चकरनगर तथा बढ़पुरा ब्लाक में 98 शासकीय तथा 224 प्राइवेट नलकूप हैं। बिजली कटौती के कारण पिछले एक सप्ताह से नलकूप शोपीस बने हैं। घोषित तौर पर तो दिन में तीन घंटे तथा रात के समय तीन घंटे कुल 6 घंटे की कटौती की जा रही है। हकीकत में क्षेत्र क ो 8 से 10 घंटे ही बिजली की सप्लाई मिल पा रही है। दिन के समय तो तीन या चार घंटे के लिए बिजली आ रही है। रात के समय किसान बदमाशों के भय के कारण सिंचाई करने के लिए नहीं जा पा रहे है। पारपट्टी क्षेत्र में नलकूपों के अलावा अन्य कोई दूसरा सिंचाई का साधन नहीं होने के कारण किसान की कमर टूट रही है। बरसात न होने के कारण खरीफ की फसल तो 60 फीसदी तक नष्ट हो चुकी है। सरसों की फसल बोने के लिए किसानाें को पलेवा के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। पारपट्टी क्षेत्र में करीब 20 हजार हेक्टेयर में फसल होती है। इसमें से 12 हजार में किसान सरसों की फसल करते है। कटौती को लेकर जनता का हर वर्ग तंग आ चुका है। सबसे ज्यादा परेशानी का सामना मध्यम और निम्न वर्ग क ो करना पड़ रहा है।
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बिजली आज की सबसे बड़ी जरूरत है। सरकार बिल के साथ अन्य चार्ज भी उपभोक्ताओं से लेती है। अघोषित कटौती के नाम पर उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है। इटावा जिले को 24 घंटे बिजली देने का दावा किया गया था। जिला मुख्यालय पर भी 12-14 घंटे से अधिक बिजली नहीं मिल पा रही है। कांग्रेस कटौती को लेकर नाराजगी प्रकट करने की रणनीति बना रही है।-उदयभान सिंह यादव, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
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पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश सरकार को घेरने तथा जनता की आवाज बुलंद करने के लिए पार्टी के पदाधिकारियों की एक आवश्यक बैठक 23 सितंबर कोे बुलाई है। इस बैठक में आंदोलन के लिए रणनीति तैयार की जाएगी। पार्टी हाईकमान का निर्देश मिलने पर कोई भी कदम उठाया जाएगा। सपा सरकार के द्वारा जनता को परेशान किया जा रहा है।-उदयवीर सिंह, निवर्तमान जिलाध्यक्ष बसपा
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प्रदेश सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। परेशान करने के लिए ही रात 12 बजे के बाद का समय कटौती का चुना गया है। भाजपा लगातार प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से सरकार का विरोध करती आ रही है। पार्टी ने सामाजिक न्याय मोर्चा का गठन किया है। मोर्चा के द्वारा 27 सितंबर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। -गोपाल मोहन शर्मा, जिलाध्यक्ष भाजपा

अघोषित कटौती बर्दाश्त नही:अनंत
इटावा। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष अनंत प्रताप अग्रवाल ने कहा कि अघोषित कटौती व्यापार हित में नहीं है। वर्तमान में कटौती का कोई समय नही है। जब मर्जी होती है तब बत्ती काट दी जाती है। दीपावली का त्योहार आ रहा है। किसी भी दशा में शाम पांच बजे के बाद कटौती नही होनी चाहिए। व्यापार मंडल जिलाधिकारी के नाम से कोयला सचिव को ज्ञापन सौंपेगा। कटौती पर रोक लगाने की मांग करने वालों में जिला महामंत्री सदाशिव श्रीवास्तव, सुनील जैन, मनीष गुप्ता, प्रत्यूष वर्मा, गुरुभेज सिंह भेजा, राजू यादव, मनोज अग्रवाल, अतुल मित्तल, इरशाद अली, फारूख अंसारी आदि प्रमुख है।
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