इटावा। उपचुनाव होते ही बिजली ने फिर से उपभोक्ताओं को सताना शुरू कर दिया है। वीआईपी कहे जाने वाले इटावा जिले में भी 10-10 घंटे की कटौती होने से जनजीवन अस्तव्यस्त है। कभी इमरजेंसी मैसेेज आने पर पावर कट कर दिया जाता है तो कभी लोकल में मेटीनेंस के नाम पर बिजली गुल कर दी जाती है। सप्लाई जारी रहने के दौरान भी थोड़ी-थोड़ी देर में ट्रिपिंग से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उपचुनाव की घोषणा के बाद से मतगणना के दिन तक सप्लाई संतोषजनक रही है, लेकिन जैसे ही नतीजे सामने आए वैसे ही बिजली की कमी के बहाने पावर कट शुरू कर दिया गया। बड़ा सवाल ये कि यदि वास्तव में बिजली की कमी है तो ऐन चुनाव के वक्त विद्युत की सप्लाई कहां से दी गई। ऐसे में पब्लिक का गुस्सा तो फुटेगा ही।
16 सितंबर तक शहर में विद्युत सप्लाई संतोषजनक रही है। 17 सितंबर से विद्युत सप्लाई का ढर्रा बिगड़ना शुरू हो गया है। 17 सितंबर को तो करीब 10 घ्ंाटे तक विद्युत की कटौती से आम आदमी को जूझना पड़ा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि कटौती का कोई शैड्यूल नहीं है। कभी भी बिजली घंटो के लिए काट दी जाती है। इसके बाद सप्लाई जारी होती भी है तो लोकल में मेंटीनेंस के नाम पर कटौैती शुरू हो जाती है। अघोषित कटौती के चलते दो दिन के भीतर ही आम आदमी तंग आ चुका है। कटौती के दौरान उपभोक्ता विद्युत अधिकारियाें के सीयूजी नंबर पर संपर्क करने का प्रयास करते है तो घंटों तक व्यस्त टोन जाती रहती है। कभी कभार बेल जाती भी है तो कॉल रिसीव नही की जाती है। कटौती के दौरान इस तरह की शिकायतें अक्सर सामने आती है। लेकिन लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की जाती है।
बिजली कटौती का कोई निर्धारित समय नहीं होने के कारण व्यापार और कारोबार तो प्रभावित तो है ही लोगों की नींद भी हराम हो चुकी है। दिन के समय कटौती चालू होने और देर रात तक जारी रहने से बिजली पर आश्रित कारोबार प्रभावित हो रहे है। फ्लोर मिल, वेल्डिंग वर्क्स, सायबर कैफे, फोटो कॉपी की दुकानों पर कामकाज नहीं हो पा रहा है। गर्मी के कारण दुकानों पर भी बैठ पाना मुश्किल हो रहा है। देर रात तक कटौती जारी होने से बाजारों में अंधेरा रहता है। दुकानें जल्दी बंद हो जाती है। बुधवार को चार बजे से रात दस बजे तक कटौती रहने के कारण शहर के प्रमुख बाजारों स्टेशन रोड, साबितगंज, गाड़ीपुरा, कचहरी रोड, स्टेशन बजरिया, फर्रुखाबाद फाटक, पक्का तालाब, तिकोनियां, पक्काबाग सहित कई बाजारों में अंधेरा पसरा रहा। उधर रात के समय कटौती होने के कारण शहरवासियों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। गर्मी के कारण जैसे ही बिजली जाती है वैसे ही लोगो की नींद टूट जाती है। दो दिनों से रात 12 बजे के बाद से बिजली का आना जाना लगा रहता है।
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कंट्रोल से निर्देश आने के कारण इमरजेंसी पावर कट किया जा रहा है। कटौती की पहले से जानकारी नहीं रहती है। अचानक सूचना आती है और पावर कट करना पड़ रहा है। कटौती का यहां से कोई संबंध नहीं है। शायद बिजली कमी के कारण इमरजेंसी कटौती की जा रही है।-रामवीर सिंह, अधिशासी अभियंता, ट्रांसमिशन, इटावा