इटावा। ग्र्रामीण क्षेत्र में डायलिसिस पर चल रहीं स्वास्थ्य सेवाओं को संजीवनी देेने के लिए जिले के 10 गांवों में उप स्वास्थ्य केंद्र भवनों का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए एक करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। उप स्वास्थ्य केंद्र खुलने के बाद ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को राहत तो मिलेगी ही सीएचसी और पीएचसी पर लोड भी कम होगा।
बताया जाता है कि प्रत्येक उप स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण पर 9.25 लाख रुपये खर्च किए जा रहे है। तीन उप स्वास्थ्य केंद्र भवनों परसौआ, घसारा, जनकपुरा का निर्माण कार्य प्रारंभ भी हो गया है। शेष सात का निर्माण कार्य भी इसी माह शुरू होने की संभावना है। छह माह के भीतर सभी दस भवनों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। काम पूरा कराने की जिम्मेदारी आरईएस को दी गई है। अभी तक भवन न होने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। वहीं लोगों क ो हल्की पूरी बीमारी के लिए भी सीएचसी या पीएचसी के चक्कर लगाने पड़ते थे।
उप स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं को जांच की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा उन्हें सलाह देने के लिए एएनएम भी रहेगी। मलेरिया की स्लाइड बनाई जाएगी। परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री का वितरण भी किया जाएगा। हालांकि इन उप स्वास्थ्य केंद्रों को चालू करने क ी राह में सबसे बड़ी बाधा पैरामेडिकल स्टाफ की है। जिला अस्पताल से लेकर पीएचसी तक में पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी महसूस की जा रही है। इन उप स्वास्थ्य केंद्रों पर सेवाएं प्रदान करने के लिए स्टाफ कहां से लाया जाएगा। आफ द रिकार्ड अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की पूर्ति के लिए संविदा के आधार नियुक्तियां किए जाने का विकल्प है। उप स्वास्थ्य केंद्रों के पास खुद का भवन न होने के कारण स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। अधिक तर ग्रामीण सुविधाएं न मिल पाने के कारण सीएचसी और पीएचसी पर जाते थे। उप स्वास्थ्य केंद्र चालू हो जाने के बाद ग्रामीणों को राहत मिलेगी।
--
जिले में 10 उप स्वास्थ्य केंद्र बनाने का जिम्मा आरईएस को दिया गया है। प्रत्येक भवन के निर्माण पर 9.25 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। तीन भवनों का निर्माण कार्य प्रारंभ भी कर दिया गया है। स्टाफ की व्यवस्था शासन के निर्देश पर की जाएगी। - डॉ. मंजू शर्मा, सीएमओ, इटावा