फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भगवान भरोसे है सुरक्षा व्यवस्था

Thu, 24 Jan 2013 05:31 AM IST
Etawah
विज्ञापन
विज्ञापन
इटावा। रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, प्रमुख बाजारों एवं सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है। बड़े शहरों में तो फिर भी सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन छोटे शहरों में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ तरह-तरह के दावे ही किए जाते हैं, क्रियान्वयन कहीं नहीं दिखता है। कानपुर सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर आठ-नौ पर मंगलवार को बम फटने की घटना के बाद ‘अमर उजाला’ टीम ने बुधवार को यहां के रेलवे स्टेशन, बस अड्डा और शहर के प्रमुख बाजारों का जायजा लिया तो सुरक्षा व्यवस्था सभी जगह मुंह चिढ़ाती दिखी। सबसे ज्यादा बदहाल सुरक्षा व्यवस्था रेलवे स्टेशन व बस अड्डा पर दिखाई दी। इन जगहों की स्थिति यह है कि बम की बात तो छोड़िए अगर कोई मिसाइल लेकर भी घूमे तो कोई रोकने टोकने वाला नहीं है।
विज्ञापन

वीआईपी जिले के रेलवे स्टेशन पर स्थिति चौंकाने वाली मिली। सरकुलेटिंग एरिया में बेतरकीब ढंग से वाहन खड़े थे। इन वाहनों के भीतर नीचे कुछ भी रखा हो कोई देखने वाला नहीं। स्टेशन के प्रवेश द्वार पर भी कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। यात्रियों की चेकिंग के लिए न तो सुरक्षाकर्मी तैनात मिले और नहीं मेटल डिटेक्टर की व्यवस्था थी। चौंकाने वाली बात यह रही कि जीआरपी थाने के ठीक सामने रेलवे स्टेशन की छत पर जाने का रास्ता है। ‘अमर उजाला’ टीम एक-एक कर छत पर चढ़ी, लेकिन किसी ने रोका नहीं। छत पर देशी शराब की तमाम खाली बोतल पड़ी थीं। इससे यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि अवांछनीय तत्व स्टेशन की छत पर पहुंचकर खुलेआम शराब का सेवन करते होंगे। करीब एक घंटे तक यहां घूमने के बाद कहीं कोई सुरक्षाकर्मी नजर नहीं आया। इसके अलावा यहां पर दर्जन भर से अधिक चोर दरवाजे भी हैं।
रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था की टोह लेने के बाद ‘अमर उजाला’ टीम बस अड्डे पर पहुंची तो यहां भी सब कुछ भगवान भरोसे मिला। कहीं भी कोई सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आई। चारों ओर से खुले बस अड्डे में आड़ी तिरछी खड़ी बसों में मनमाने तरीके से यात्री सवार हो रहे थे। रोडवेज की बसों में कुछ भी रख दिया जाए तो कोई देखने वाला नहीं। सामने बाउंड्री वाल व द्वार न होने से स्टेशन सीमा के शुरू में ही कुछ हाथ ठेला वाले दुकान लगाए मिले। यात्रियों को बस पर बैठाने आने वाले उनके परिजनों की गाड़ियां भी बेतरकीब तरीके से खड़ी दिखीं। आसपास के दुकानदारों की माने तो बस अड्डे पर रोजाना ऐसा ही नजारा रहता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि यदि बस अड्डे के किसी कोने या बस के अंदर कोई आपत्तिजनक वस्तु रख दी जाए तो उससे निपटने की कोई व्यवस्था नहीं है। यही नहीं कोई वारदात होने पर आपदा प्रबंधन का भी इंतजाम नहीं है।
विज्ञापन

शहर के प्रमुख बाजार भी सुरक्षित नहीं हैं। बाजारों को अगर कभी खतरा हुआ तो मनमाने तरीके से खड़े होने वाले वाहनों से हो सकता है। भीड़भाड़ वाले बाजारों में सड़क किनारे खुलेआम वाहन खड़े होते हैं। ऐसे में कोई भी व्यक्ति अपने वाहन में कोई भी चीज फिट करके खड़ा कर सकता है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें