इटावा। बाबा साहेब डॉ. बीआर आंबेडकर कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की 88 सीटें दूसरी काउंसलिंग के बाद भी नहीं भर सकी हैं। सत्र आधा बीतने के कारण अब सीधे प्रवेश का विकल्प भी नहीं बचा है।
इंजीनियरिंग कॉलेज की 144 सीटों पर सिर्फ 56 छात्र-छात्राओं ने ही प्रवेश लिया है। 88 सीटों को भरने के लिए कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में होने वाली काउंसलिंग पर नजर थी। इसमें छात्र-छात्राओं की संख्या कम रही। जिन्होंने रुचि दिखाई, उन्हें कानपुर में ही प्रवेश मिल गया। ऐसे में इस कॉलेज की रिक्त सीटें नहीं भर पाईं।
इंजीनियरिंग कॉलेज में मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस व एग्रीकल्चर साइंस में 36-36 सीटें हैं। पहली काउंसलिंग सितंबर में हुई थी। तब मैकेनिकल में एक, इलेक्ट्रानिक्स में छह, कंप्यूटर साइंस में 29 और एग्रीकल्चर साइंस में 20 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया था। 56 सीटें ही भर सकी थीं। हालांकि कॉलेज प्रशासन के पास सीधे प्रवेश से सीटों को भरने का विकल्प था लेकिन सत्र के आधा बीत गया है। ऐसे में अब ये विकल्प भी बंद है।
कैंपस सिलेक्शन न होने से घट रही रुचि
इंजीनियरिंग कॉलेज की सीटों के पूरी तरह न भर पाने के पीछे कैंपस सिलेक्शन न होना भी कारण है। प्लेसमेंट न होने के कारण छात्रों की रुचि यहां प्रवेश लेने में घटी है। छात्र-छात्राएं जब कॉलेज का चयन करते हैं तो उनके मन में अच्छी पढ़ाई के साथ ही अच्छी नौकरी की भी इच्छा होती है। इंजीनियरिंग कॉलेज का प्रशासन भी मानता है कि कैंपस सिलेक्शन की सुविधा हो जाए तो छात्र-छात्राओं का रुझान बढ़ेगा।
दूसरी काउंसलिंग से उम्मीद थी कि कॉलेज की कुछ और सीटें भर जाएंगी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। काउंसलिंग में कम छात्र-छात्राओं ने ही रुचि दिखाई। सीधे प्रवेश का विकल्प भी सत्र करीब आधा बीतने के कारण बंद हो गया है। - एनके शर्मा, डीएन, इंजीनियरिंग कॉलेज, इटावा।