श्रीनगर स्थित भंडारा स्थल पर बृजेश मिश्रा।
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कश्मीर के बिगड़े हालात ने अमरनाथ यात्रियों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं। आतंकी बुरहान की मौत के बाद हालात इस कदर खराब हुए कि जिले केे करीब 500 श्रद्धालु घाटी की हिंसा के बीच विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए हैं। मोबाइल और नेटवर्क सेवा बंद होने से ये भी पता नहीं चल पा रहा कि श्रद्धालु कहां रुके हैं। फिलहाल किसी भी अमरनाथ यात्री की वापसी नहीं हुई है।
अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था जिले से 28 जून को रवाना हुआ था। तबसे अब तक कुल 13 जत्था जा चुके हैं। यह श्रद्धालु श्री आनंदेश्वर महाराज अमरनाथ बर्फानी सेवा मंडल, शिव सेवक संघ नई दिल्ली और श्री अमरनाथ बर्फानी सेवा समिति के रजिस्ट्रेशन पर दर्शन करने गए हैं। श्रद्धालुओं की संख्या 500 के आसपास मानी जा रही है। इनमें 90 श्रद्धालु ऊसराहार क्षेत्र से हैं। 50 लोग शिव सेवक संघ के जिला संयोजक राजीव लोचन दीक्षित की अगुवाई में गए हैं। 70 लोगों का जत्था जसवंतनगर से रवाना हुआ है। 13 लोग शहर के सती मोहल्ला से यात्रा पर गए हैं। 40 लोग शहर से सटे कुनैरा गांव से बर्फानी बाबा के दर्शन करने गए हैं। कुनैरा गांव के श्रद्धालु 9 चार पहिया वाहन से गए हैं। जिनकी अगुवाई शैलेंद्र यादव और बासू तिवारी कर रहे हैं।
व्हाट्स एप और फेसबुक पर फोटो और पोस्ट अपलोड करके श्रद्धालु अपने बारे में बताते रहे हैं। लेकिन दो दिन से उनकी लोकेशन मिलना बंद हो गई है। यात्रा पर श्रद्धालुु बासू तिवारी के भाई बर्फानी सेवा मंडल के उपाध्यक्ष अमित तिवारी ने बताया कि दो दिन से संपर्क साधने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही।
आनंदेश्वर महाराज सेवा मंडल के महामंत्री ओमरतन कश्यप ने बताया कि कुनैरा गांव से गए चार पहिया वाहनों में से एक में जीपीएस लगा है। दो दिन पहले उनकी लोेकेशन पहलगाम में पाई गई थी। अब वह कहां हैं, इसका कोई अंदाजा नहीं है। श्री कश्यप के मुताबिक 28 जून को रवाना हुए यात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके होंगे। उम्मीद है कि वह यात्रा की वापसी में हों। लेकिन हालात बिगड़ने से कहीं फंसे हो सकते हैं।
उधर श्रीनगर के हनुमान गढ़ी मंदिर में भंडारा का आयोजन कर रहे अमरनाथ बर्फानी सेवा समिति के मंत्री बृजेश मिश्रा इस समय कश्मीर में हैं। उनके मोबाइल पर किसी तरह संपर्क हुआ तो बताया कि यहां कर्फ्यू लगा हुआ है। स्थिति बेहद तनावपूर्ण हैं। कुछ अराजक तत्वों ने मंदिर पर भी पथराव किया था। लेकिन मंदिर परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है। यहां करीब 500 श्रद्धालु ठहरे हुए हैं। जिसमें कुछ लोग इटावा के भी हैं। मंदिर परिसर में सभी श्रद्धालु पूरी तरह से सुरक्षित हैं।