जिले में लगे 1050 हैंडपंपों की रीबोरिंग के लिए जलनिगम को 5.33 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं। नए हैंडपंपों के लिए कोई धनराशि जारी नहीं की गई है। जलनिगम की मानें तो जिले में मानक से अधिक हैंडपंप लगे हैं। इसके बाद भी नए हैंडपंप की मांग लगातार हो रही है।
दरअसल इसके पीछे हैंडपंप लगाने में भाई भतीजावाद या प्रभावशाली लोगों की मनमानी बड़ा कारण माना जा रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर लगने वाले हैंडपंप लोगों ने अपने दरवाजों पर लगवा रखे हैं। जिससे आम जनमानस को परेशानी हो रही है। साथ ही तमाम हैंडपंप खराब पड़े हैं।
इन सब वजहों के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में नए हैंडपंपों की मांग लगातार बनी हुई है। आलम यह है कि मंत्रियों, सांसद और विधायकों आदि के पास नए हैंडपंप की मांग से जुड़े प्रार्थना पत्र आएदिन आते रहते हैं और यह संख्या हजारों में है। नए हैंडपंपों की जगह शासन ने खराब पड़े हैंडपंपों के लिए राशि जारी की है।
इस वित्तीय वर्ष में गत वर्ष की मांग को मिलाकर हैंडपंप रिबोर के लिए जलनिगम को पैसा दिया गया है। गत वर्ष सूखा राहत के तहत कुल 650 रिबोर हैंडपंप के लिए इस वर्ष कुल 357.13 लाख रुपये प्रदान किए गए हैं। इसी तरह चालू वित्तीय वर्ष के लिए 176.7 लाख रुपये कुल 400 रिबोर हैंडपंप के लिए मिला है।
लिहाजा विभाग नए हैंडपंप लगाने की जगह खराब पड़े हैंडपंपों को ही दुरुस्त कर रहा है। उन लोगों को इससे मायूसी हाथ लगी है। जो नए हैंडपंप लगने की आस लगाए बैठे हैं। जलनिगम के आंकड़ों के अनुसार जिले में 1630 हैंडपंप रीबोर होने हैं। जिनमें से 400 हैंडपंपों को पहले रीबोर किया जा चुका है। अब 1050 हैंडपंपों के लिए उक्त धनराशि मिल गई है।