यमुना का पानी कम होते ही कंधेसी घार पुल पर काम शुरू
42 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा पुल के दिसंबर से आम जनता के लिए खुल सकता है
- मप्र और बकेवर जाने वालों को होगी सहूलियत
गोपाल त्रिपाठी
बकेवर। यमुना नदी के दो किनारों पर बसे नवादा बहादुरपुर व कंधेसी गांव इस साल के अंत तक एक दूसरे से जुड़ जाएंगे। यमुना नदी पर बनने वाला पुल दिसंबर तक बनकर तैयार हो जाएगा। यमुना में पानी कम होने का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद 4 पिलरों की छत पड़ने का काम होगा। पुल बन जाने के बाद नवादा बहादुर क्षेत्र के लोगों को चकरनगर या मध्यप्रदेश जाने के लिए 20 से 30 किमी का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। कंधेसी व उसके आसपास के लोगों को बकेवर लखना आने के लिए 25 किमी का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
लखना से 8 किमी दूर स्थित बीहड़ी गांव नवादा बहादुरपुर के सामने यमुना नदी पर पुल का निर्माण कार्य पिछले पांच सालों से चल रहा है। 440 मीटर लंबे व लगभग 8.4 मीटर चौड़ा पुल बना रहा है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद पुल का निर्माण कार्य बजट के चलते रुक गया था। अब बजट पुन: रिवाइज होने के बाद कार्य चालू हो गया है। पुल का निर्माण कार्य राज्य सेतु निगम करा रहा है।
पुल के बन जाने से यमुना नदी के उस समूचे बीहड़ क्षेत्र के दोनों तरफ के आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को आवागमन में काफी सुविधा हो जाएगी। लोगों को आवागमन में कई किमी का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। यमुना नदी के इस पार नबादा, बहादुरपुर, बिझाई, आदि सहित करीब एक दर्जन गांवों के लोगों को चकरनगर या मध्यप्रदेश जाने के लिए लखना होकर नहीं जाना पड़ेगा। इससे उनको चकरनगर जाने के लिए नौ किमी का चक्कर नही लगाना पड़ेगा। वहीं पुल के उस पार के गांव कंधेसी, रूरा आदि सहित तमाम गांवों के लोगों को लखना बाजार करने जाने के लिए बकेवर होकर औरैया कानपुर आदि जगहों पर जाने के लिए करीब 20 किमी का चक्कर लगाकर नहीं जाना पड़ेगा। इस क्षेत्र के लोगों के दशकों का इंतजार साल के अंत तक समाप्त हो जाएगा।
निर्माण कार्य प्रभारी सेतु निगम के जेई पी के गुप्ता ने बताया कि पुल के 16 पिलर हैं जो बन चुके हैं। मात्र चार पिलरों की बीम व छत पड़ना बाकी है। शेष काम करीब करीब हो चुका है।
राज्यसेतु निगम के परियोजना प्रबंधक क्यू एम अंसारी ने बताया कि पुल को दिसंबर माह तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। अभी यमुना नदी में पानी कम होने का इंतजार करना पड़ रहा है।
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साढ़े सात करोड़ बढ़ी लागत
बकेवर। पुल की लागत 7.5 करोड़ बढ़ गई है। परियोजना प्रबंधक क्यू एम अंसारी ने बताया जब पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था तो इसका बजट लोकनिर्माण विभाग के कार्यों सहित 34. 5 करोड़ था। इसमें 19.5 करोड़ सेतु निगम के लिए थे, जबकि 15 करोड़ लोकनिर्माण विभाग के कार्य के लिए था। अब रिवाइज होने के बाद इस पुल का बजट 42 करोड़ हो गया है। इसमें 25 करोड़ सेतुनिगम के व 17 करोड़ पीडब्लूडी के कार्य के लिए है।
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दस लोगों की मौत के बाद बनना शुरू हुआ पुल
बकेवर। वर्ष 2013 में यमुना नदी में एक नाव डूब गई थी। नाव में सवार लोगों में से दस लोगों की डूबने से मौत हो गई थी। सभी डूबने वाले नवादा गांव के ही थे। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। प्रदेश सरकार में उस समय नंबर दो की हैसियत रखने वाले तत्कालीन लोकनिर्माण मंत्री शिवपाल सिंह घटना के बाद शोक व्यक्त करने पहुंचे थे। लोगों ने यमुना पुल की मांग उनसे की तो शिवपाल सिंह ने मौके पर ही लोगों की मांग पर कंधेसी नवादा के सामने पुल निर्माण की घोषणा कर दी थी। पुल का निर्माण भी शुरू हो गया था। 2017 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद पुल का काम रुक गया था। अब रिवाइज होने के बाद लॉकडाउन के एक माह पहले शुरू हुआ।
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आवागमन होगा आसान
ग्राम बहादुर पुर निवासी प्रधान प्रतिनिधि एवं पूर्व प्रधान महेश सिंह चौहान ने बताया कि इस पुल के बनने से इस क्षेत्र के हजारों लोगों को आवागमन में बहुत आसानी हो जाएगी।
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अब मध्य प्रदेश तक जा सकेंगे
ग्राम बहादुर के क्षेत्र पंचायत सदस्य अनुज चौहान ने बताया कि यमुना पुल इस क्षेत्र के लोगों के लिए लखना, बकेवर, चकरनगर, कानपुर आगरा , मध्य प्रदेश आदि जाने में बहुत सहूलियत देगा।
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20 किमी का चक्कर बचेगा
यमुना पार ग्राम कंधेसी निवासी केदारनाथ ने बताया कि पुल बन जाने से उनके गांव सहित कई गांवों के लोगों अब लखना बाजार करने जाने के लिए 20 किमी का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
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क्षेत्र के लिए होगी बड़ी उपलब्धि
ग्राम कंधेसी निवासी विशंभर ने बताया कि पुल का निर्माण होना इस समूचे क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। लोगों को बहुत मदद मिलेगी।
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अब बाजार की दूरी होगी कम
ग्राम कंधेंसी निवासी युवक सौरभ ने बताया कि यहां से चकरनगर 14 किमी दूर पड़ता है। चकरनगर में कोई बाजार नहीं होने से ग्रामीणों को लखना के बाजार में सौदा लेने आना पड़ता है। चकरनगर से लखना 11 किमी पड़ता है। पुल बन जाने से ग्रामीणों को मात्र लखना आने में 8 से 9 किमी ही जाना पड़ेगा।
फोटो संख्या 40 अनुज चौहान- फोटो : ETAWHA
फोटो संख्या 41 विशंभर सिंह- फोटो : ETAWHA
फोटो संख्या 42 सौरभ- फोटो : ETAWHA
फोटो संख्या 43 केदार नाथ- फोटो : ETAWHA
फोटो संख्या 44 महेश सिंह चौहान- फोटो : ETAWHA