सैफई। सैफई विश्वविद्यालय में सुरक्षा की कमान संभालने के लिए आई प्रयागराज की कंपनी निश्चल सुविधा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड का टेंडर निरस्त कर दिया गया है। कंपनी ने 40 लाख रुपये की बैंक गारंटी का फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर टेंडर पास कराया था। कमेटी ने बैंक से जांच कराई तो इसका पता चला। इसी आधार पर कार्रवाई की गई है।
विश्वविद्यालय में पिछले एक माह से संविदा कर्मी धरने पर बैठे थे और वित्त निदेशक पर टेंडर में अनियमितता का आरोप लगाया था। सूत्रों के मुताबिक 30 जून 2022 को वरिष्ठ वित्त नियंत्रक अमितोष श्रीवास्तव और लेखाधिकारी का स्थानांतरण हो गया था। इसके बाद शासन के निर्देशन पर विश्वविद्यालय के मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी प्रदीप कुमार को टेंडर प्रकोष्ठ का प्रभार सौंपा गया था।
वित्त निदेशक के कहने पर कुलपति डॉ. प्रभात कुमार सिंह ने तत्काल प्रदीप कुमार से टेंडर प्रकोष्ठ का प्रभार हटाकर जेडीएम डॉ. धीरज सिंह को सौंप दिया। जबकि उनके पास पहले से ही कई अतिरिक्त प्रभार थे। विश्वविद्यालय में एक वरिष्ठ मुख्य वित्त और लेखा अधिकारी होने के बावजूद एक चिकित्सक को प्रभार सौंपने से सवाल खड़े हुए थे।
सैफई विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार यहां एसजीपीजीआई लखनऊ के नियम लागू हैं। एसजीपीजीआई में संयुक्त निदेशक सामग्री प्रबंधन का काम मुख्य वित्त एवं लेखा अधिकारी द्वारा किए जाते हैं। शासन द्वारा नियुक्त किए गए अधिकारी से प्रभार लेकर किसी चिकित्सक को सौंपना नियम विरुद्ध है।
कुलपति डॉ. प्रभात कुमार सिंह का कहना है कि अभी कर्मचारियों का मामला शांत कराया गया है। खामियां सामने आने के बाद टेंडर निरस्त किया गया है। इसमें जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में पिछले एक महीने से नई एजेंसी के खिलाफ धरना-प्रदर्शन चल रहा था। अब एजेंसी का टेंडर निरस्त होने से कर्मचारियों ने खुशी है। विश्वविद्यालय में सुरक्षा की कमान फिर से पूर्व सैनिकों के हाथ में होगी। ये निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासन ने लिया है।
विश्वविद्यालय में वर्ष 2006 से सुरक्षा की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण निगम के पास थी। निगम की ओर से 384 सुरक्षाकर्मी और 192 वार्ड ब्वाय यहां तैनात किए गए थे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक सितंबर 2022 से नई एजेंसी को ठेका दे दिया। नई कंपनी कर्मचारियों को हटाने की बात कह रही थी, जिसके बाद कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। 22 सितंबर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने पत्र जारी करके पूर्व सैनिक सुरक्षा एजेंसी से कार्यभार नई कंपनी निश्चल सुविधा सर्विसेज लिमिटेड को देने के लिए कहा था।
प्राइवेट सुरक्षा गार्डों ने विश्वविद्यालय में सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल भी ली थी। धरना-प्रदर्शन में तीन बार प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव शामिल हुए थे। उन्होंने कर्मचारियों को आश्वासन दिया था कि उन्हें नहीं हटाया जाएगा। शुक्रवार देर रात विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रभात कुमार सिंह, प्रतिकुलपति डॉ. रमाकांत यादव प्रशासनिक अधिकारियों के साथ धरनास्थल पर पहुंचे और टेंडर निरस्त करने की जानकारी दी। वापस काम पर रखने के लिए कहा गया है। (संवाद)