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अली की शख्सियत किसी से छुपी नहीं : जैदी

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इटावा। मौलाये कायनात हजरत अली के यौम-ए-पैदाइश की खुशी में गत गुरुवार की रात सैदबाड़ा स्थित शरीफ मंजिल में महफिल का आयोजन हुआ। इसमें शायरे एहलेबैत ने मौला अली की शान में कलाम पेश किए।
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शरीफ मंजिल में राहत अकील शक्कन की ओर से आयोजित महफिल में मौलाना सैयद अनवारुल हसन जैदी ने कहा कि मौला अली का जन्म 13 रजब को काबे में हुआ। मौला अली ने रसूल की गोद मे आकर आंखें खोलकर सबसे पहले रसूल की जियारत की। आज पूरी दुनिया में अली का यौम-ए-पैदाइश मनाया जा रहा है। अली की शख्सियत किसी से छुपी नहीं है। अली की हुकूमत में कोई इंसान भूखा नहीं रहा।

इसके बाद सलीम रजा ने कलाम पेश किया कि दोस्तों के लिए खालिक की जियारत का शरफ, दुश्मनों के लिए शमशीर अली का चेहरा। तनवीर हसन ने कलाम पेश करते हुए कहा कि बाखुदा पूरी खुदाई पे है कुदरत उसकी, वो अगर चाहे तो दीवार में रास्ता कर दे, जब तक फातिमा जहरा की न मर्जी होगी, गैर मुमकिन है कि अल्लाह सवेरा कर दे।
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सलमान रिजवी ने कहा कि जो अली की चौखट से वास्ता नहीं रखते, उनसे कोई भी रिश्ता मुस्तफा नहीं रखते।

महफिल में हाजी रईस जाफरी, हाजी अरशद मरगूब, अली साबिर, गुलामुस सैयदेन, राहत अकील, इंतिजार नक़वी, शावेज नक़वी, अली मेहंदी, जहीर अब्बास, अबरार हुसैन, राहत रिजवी, मो. जुनैद आदि ने शिरकत की।
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