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प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार लवेदी का आयुर्वेदिक अस्पताल

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अमर उजाला ब्यूरो
बकेवर।
प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार आयुर्वेदिक अस्पताल लवेदी में इलाज के नाम पर कुछ भी नहीं है। अस्पताल रोजाना नहीं खुलता है और जब खुलता भी है तो महज एक फार्मेसिस्ट के मौजूद रहने से लोग घर लौट जाते हैं। क्षेत्रीय समाजसेवियों ने आयुर्वेदिक अस्पताल में चिकित्सक की तैनाती और रोजाना अस्पताल खुलवाए जाने की मांग की हैं।

समाजसेवी अमरनाथ त्रिपाठी ने बताया कि उनके पिता भगवंत राव मुखिया ने सन 1980 में स्थानीय स्तर पर अपनी निजी भूमि और 2500 रुपये देकर आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण कराया था। साल दो साल तो अस्पताल सही चला और बीमार लोगों को दवा के नाम पर चूरन चटनी मिली, लेकिन जब से इस अस्पताल को सरकारी सुविधाएं मिलनी शुरू हुई तो क्षेत्रीय समाजसेवियों ने सेवा के नाम पर अपने हाथ सिकोड़ने शुरू कर दिए। अब अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं है। महज एक फार्मेसिस्ट के हवाले ही कभी कभार अस्पताल खुलता है।
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इस संबंध में आयुष जिला प्रभारी डॉ. निहारिका यादव ने बताया कि उन्हें अभी भलीभांति यह भी जानकारी नहीं है कि जिले में कुल कितने आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। समाज सेवी पूर्व प्रधान आलोक तिवारी, शालू तिवारी, अभिताभ तिवारी, कौशलेंद्र तिवारी, सुबोध त्रिपाठी, भानू शुक्ला आदि ने अस्पताल के अविलंब सुविधाओं और कर्मचारियों की तैनाती की मांग की है।

- समाजसेवियों ने चिकित्सकों की तैनाती कर अस्पताल खुलवाने की मांग की
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