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Etawah News: 277 नलकूपों के गले सूखे, 491 के सहारे 2.80 लाख किसान

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फोटो 10::बढ़पुरा क्षेत्र के गांव दवाह में पाइप टूटने के कारण बंद पड़ा सरकारी नलकूप। संवाद
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फोटो 11::ताखा क्षेत्र के ग्राम बछरोई कछपुरा में सरकारी नलकूप पर लगा ताला। संवाद
फोटो 12::अमित।
फोटो 13:: गोविंद।

277 नलकूपों के गले सूखे, 491 के सहारे 2.80 लाख किसान
क्रासर
- इन्हें चलाने के लिए भी सिर्फ 82 ऑपरेटर हैं तैनात

संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। जिले में सरकारी नलकूपों से किसानों को राहत देने के नलकूप विभाग के दावे जमीनी हकीकत में खोखले साबित हो रहे हैं। 469 ग्राम पंचायतों के 2.80 लाख किसानों के लिए संचालित 491 नलकूप संचालित हैं। हालांकि इन्हें चलाने और बंद करने के लिए लगाए जाने वाले ऑपरेटर सिर्फ 82 ही हैं। ऐसे में नलकूपों का संचालन नियमित कैसे हो पा रहा होगा यह सवाल ही विभाग के दावों को पानी-पानी करने के लिए काफी है। विभाग के दावों को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने ग्राउंड पर जाना तो भी हकीकत दावों उलट ही मिली है।
जिले के विभिन्न आठ ब्लॉकों में कुल 768 नलकूप स्वीकृत हैं। इनमें से 491 ही वर्तमान में सही हैं। इनको चलाने के लिए विभाग के पास महज 82 ऑपरेटर बचे हैं। यानी एक-एक ऑपरेटर के कंधे पर पांच से छह नलकूपों को चालू करने की जिम्मेदारी है। नतीजा यह है कि नलकूप चालू हालत में होने के बावजूद ऑपरेटर के इंतजार में किसानों के खेत सूखे पड़े हैं और पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है।
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डीजल के बढ़ते दामों से चिंता में किसान
सरकारी तंत्र की इस नाकामी का खामियाजा किसानों को अपनी जेब ढीली करके भुगतना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते डीजल के दामों ने किसानों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। सरकारी नलकूप न चलने के कारण मजबूरन किसानों को निजी पंपिंग सेट का सहारा लेना पड़ रहा है। डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह से निजी नलकूप संचालक मुंहमांगे दाम वसूल रहे हैं। किसानों का कहना है कि लागत इतनी बढ़ गई है कि फसल बेचने पर मूलधन निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।

चकरनगर और जसवंतनगर में सबसे ज्यादा नलकूप खराब
सरकारी आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि जिले में सरकारी सिंचाई व्यवस्था की दशा बहुत ही दयनीय है। इसमें चकरनगर ब्लॉक की स्थिति सबसे भयावह है, जहां कुल 161 नलकूपों में से 93 नलकूप पूरी तरह फेल (असफल) हो चुके हैं। वहीं जसवंतनगर ब्लॉक में भी 141 नलकूपों में से 39 नलकूप दम तोड़ चुके हैं और 13 को हमेशा के लिए परित्याग (बंद) घोषित कर दिया गया है। यही हाल बढ़पुरा ब्लॉक का है यहां सबसे ज्यादा 96 नलकूप चालू तो दिखाए गए हैं, लेकिन यहां भी 18 नलकूप अभी सुधारात्मक श्रेणी में लटके हैं। वहीं पूरे जिले की बात करें तो 216 नलकूप पूरी तरह असफल हो चुके हैं और 35 नलकूपों का हमेशा के लिए परित्याग कर दिया गया है, जिन्हें दोबारा ठीक करने की उम्मीद विभाग छोड़ चुका है। जबकि 26 नलकूप ऐसे है जिन्हें सुधारने की कवायद की जा रही है।

ब्लॉकवार चालू नलकूपों पर एक नजर
ब्लॉक चालू नलकूप
महेवा 67
चकरनगर 64
भरथना 31
ताखा 37
बढ़पुरा 96
बसरेहर 48
जसवंतनगर 86
सैफई 62
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केस-एक

फोटो 10::बढ़पुरा क्षेत्र के गांव दवाह में पाइप टूटने के कारण बंद पड़ा सरकारी नलकूप। संवाद
एक साल में नहीं सुधर सका पाइप
उदी। ब्लॉक बढ़पुरा क्षेत्र के गांव दवाह में सरकारी नलकूप का लोहे का पाइप पिछले एक साल से टूटा पड़ा है, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मक्का की फसल की सिंचाई के लिए किसानों को मजबूरी में निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है।

केस-दो

फोटो 11::ताखा क्षेत्र के ग्राम बछरोई कछपुरा में सरकारी नलकूप पर लगा ताला। संवाद

अक्सर बंद रहता है बछरोई कछपुरा का नलकूप
ताखा। ब्लॉक क्षेत्र में 37 नलकूपों का संचालन किया जा रहा है। लेकिन ऑपरेटर न होने से अधिकांश नलकूप गांव के किसानों व प्रधानों के माध्यम से चलाए जा रहे है। बछरोई कछपुरा में बना सरकारी नलकूप अक्सर बंद रहता है। इससे सभी किसानों को सिंचाई का लाभ नहीं मिल पाता है। किसान अजय कुमार, जगदीश ने बताया कि कई बार नलकूपों की व्यवस्थाओं को दुरस्त करने के लिए शिकायतें की लेकिन नतीजा सिफर रहा। (संवाद)

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यह है जिले के नलकूपों की स्थिति
जिले के 768 नलकूपों में से सभी ब्लॉकों में सिर्फ 491 नलकूप संचालित है। इसके साथ ही 26 नलकूप ऐसे है जिन्हें सुधारा जा रहा है। वहीं 216 नलकूपों फेल हो गए और 35 नलकूपों को कंडम घोषित कर दिया गया।
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किसानों की बात
फोटो 12::अमित।
1. किसान अमित ने बताया कि पिछले एक साल से नलकूप का पाइप खराब पड़ा है। कई बार परेशानी होने पर ग्रामीणों ने अपने निजी खर्च से पाइप को सही कराया, लेकिन कुछ समय बाद वह फिर टूट गया।

फोटो 13:: गोविंद।
2. किसान गोविंद ने बताया कि सरकारी नलकूप किसानाें की सहूलियत के लिए बनाए गए थे लेकिन साल दर साल इनकी स्थिति दयनीय होती जा रही है। यह सिर्फ कागजों में ही चल रहे है, हकीकत बहुत ही दयनीय है।
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वर्जन

सरकारी नलकूपों की संख्या के सापेक्ष ऑपरेटरों की संख्या काफी कमी है। कम ऑपरेटरों के कारण किसानों के साथ-साथ कर्मचारियों को भी परेशानी होती है। कई सालों से शासन स्तर से ऑपरेटरों की भर्ती ही नहीं हुई है, इस बीच में कई कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो गए। सीमित संसाधनों में बेहतर करने का प्रयास किया जाता है।
मंगलदास, एक्सईएन, नलकूप खंड प्रथम
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