जसवंतनगर (इटावा)। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी मनाई गई। इसे अक्षय नवमी भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं आंवला के पेड़ के नीचे बैठकर संतान प्राप्ति और उनकी सलामती के लिए पूजा करती हैं। इस दिन आंवला के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करने का भी चलन है।
बताते है कि आंवला नवमी को ही भगवान विष्णु ने कुष्मांडक दैत्य को मारा था। इस दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने कंस वध से पहले तीन वन की परिक्रमा की थी। आज भी लोग अक्षय नवमी पर मथुरा-वृंदावन की परिक्रमा करते हैं। संतान प्राप्ति के लिए इस नवमी पर पूजा का विशेष महत्व है।
महिलाएं आंवला वृक्ष की जड़ में शुद्ध जल अर्पित करती है, फिर उसकी जड़ में कच्चा दूध डालकर पूजन सामग्रियों से वृक्ष की पूजा कर उसके तने पर कच्चा सूत या मौली आठ परिक्रमा करते हुए लपेटती है। कुछ जगह 108 परिक्रमा भी की जाती है। इसके बाद परिवार और संतान के सुख-समृद्धि की कामना करके वृक्ष के नीचे ही बैठकर परिवार, मित्रों सहित भोजन करतीं हैं।
-महिलाओं ने आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर किया भोजन
अमर उजाला ब्यूरो