छात्रवृत्ति भुगतान की पेचीदा प्रक्रिया के चलते वर्ष 2016-17 में हजारों छात्रों को भारी पड़ रही है। ऐसा ऑनलाइन फीडिंग में जरा सी चूक से हुआ है। पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) ने हजारों छात्रों के आवेदनों को संदिग्ध डाटा में शामिल करके रिजेक्ट कर दिया है। सर्वाधिक नुकसान कक्षा 9 व 10 के छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ेगा। इस वर्ग के 3062 छात्रों ने आवेदन किया था। जिसमें से सिर्फ 871 को ही छात्रवृत्ति मिली है। पूरे छात्रवृत्ति आवेदनों में से 10647 आवेदन रिजेक्ट हुए हैं।
छात्रवृत्ति भुगतान की प्रक्रिया में गत वर्ष से बदलाव किया है। नई व्यवस्था में छात्रवृत्ति सीधे छात्र/छात्रा के बैंक खाते में पहुंचती है। इसके लिए पीएफएमएस का इस्तेमाल किया जा रहा है। छात्रवृत्ति के लिए खुद छात्र व छात्राओं को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। विद्यालय के माध्यम से यह डाटा समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभागों के पास पहुंचता है। जहां से यह लखनऊ निदेशालयों को फारवर्ड किया जाता है। जहां पीएफएमएस के जरिये सीधे छात्रों के बैंक खातों में भेजा जाता है।
इस प्रक्रिया में छात्र या विद्यालय स्तर से ऑनलाइन फीडिंग में हुई किसी छोटी सी भी चूक पर पीएफएमएस संबंधित आवेदन को संदेहास्पद डाटा में शामिल कर देता है। यदि इस संदेहास्पद डाटा को सुधारा न जाए तो सिस्टम उसे फाइनली रिजेक्ट कर देता है। इसी के चलते गत वर्ष हजारों छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति भुगतान से वंचित होना पड़ा है।
इन छात्रों के आवेदन किए रिजेक्ट
गत वर्ष के छात्रवृत्ति भुगतान के आंकड़ों को देखें तो सामान्य व अनुसूचित जाति वर्ग में कक्षा 9 व 10 के 3062 छात्रों ने आवेदन किया था। जिसमें से सिर्फ 871 का भुगतान हुआ। इसी वर्ग में कक्षा 11 व 12 के कुल 2885 आवेदनों में से 1914 का भुगतान हुआ। इसी वर्ग के डिग्री स्तर पर 16660 में से 9973 छात्र-छात्राएं ही भुगतान प्राप्त कर पाए। यहीं हाल अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र-छात्राओं का रहा है। इंटरमीडिएट के 329 में से 309 और डिग्री छात्रों के 2284 में से 1506 ही भुगतान पाने में सफल रहे।
1869 आवेदन एक ही कारण से हुए खारिज
ऑनलाइन आवेदन खारिज होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। यह कारण विभागों की वेबसाइट पर भी हैं। सबसे अधिक 1869 आवेदन सिर्फ यूपी बोर्ड के डाटा से मिलान न होने की वजह से रिजेक्ट हुए। विभागीय कर्मियों के मुताबिक छात्रवृत्ति आवेदन पहले मांगे गए। जबकि यूपी बोर्ड में पंजीयन प्रक्रिया बाद में अपनाई गई। लिहाजा सिस्टम ने पंजीयन संख्या न होने पर आवेदन रिजेक्ट कर दिए। इसके अलावा आय-जाति प्रमाण पत्रों की संख्या, निवास प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर, बैंक खाता नंबर आदि कई कारणों से सिस्टम ने आवेदनों को संदेहास्पद माना। नतीजतन छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति से वंचित होना पड़ा।
वर्जन
गत वर्ष जो दिक्कतें रही हैं। उन्हें दूर किया गया है। इस बार अब तक जो आवेदन हुए हैं। उनमें रिजेक्ट आवेदनों की संख्या पहले से काफी कम है। हालांकि अभी यह प्रक्रिया जारी है। छात्र व विद्यालय को त्रुटियां सुधारने का पर्याप्त समय भी मुहैया कराया जाता है।
शिव कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी, इटावा