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आरटीओ कार्यालय का काम नही आया ढर्रे पर

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अमर उजाला ब्यूरो
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इटावा। रिश्वतखोरी व फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद से आरटीओ दफ्तर में अभी तक काम काज सामान्य नहीं हो सका है। दो एआरटीओ व फर्जी बाबुओं की गिरफ्तारी के बाद से आफिस में कर्मचारियों का संकट है। जिसका असर वाहनों के पंजीयन से लेकर तमाम दूसरे कार्यों पर भी पड़ रहा है। शुक्रवार को वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन यहां रजिस्ट्रेशन न होने से वाहन स्वामियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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मालूम हो कि पिछले दिनों आरटीओ दफ्तर में छापामारे कर पुलिस ने वाहनों के फर्जी पंजीयन करने वाले गिरोह का खुलासा किया था। इस मामले में यहा तैनात एआरटीओ मोहम्मद अजीम व एसआरटीओ हिमांशु जैन व एक निजी कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया था। जबकि इस गोरखधंघे में शामिल लिपिक बेबी फरार हो गई थी। कई दिनों तक इस वजह से भी दफ्तर में कामकाज प्रभावित रहा। मौजूदा समय में यहां केवल पांच लिपिक कार्यरत है। जबकि चार लिपिकों के पद रिक्त है। आरटीओ राकेश सिंह ने जल्द ही इन पदों पर तैनाती का दावा किया था लेकिन सप्ताह भर बाद भी कोई तैनाती नहीं हुई। बाबू नही आया। यात्री कर अधिकारी एके जैसल ने बताया कि लिपिकों की कमी के चलते काम काज प्रभावित हो रहा है। रजिस्ट्रेशन के अलावा वाहनों की फिटनेस का भी प्रमाण पत्र जारी करने में देरी हो रही है।
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- बाबुओं की कमी से कामकाज प्रभावित
- वाहनों के पंजीयन व फिटनेस की जांच पर असर
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