राजस्थान की सरकारी गोशाला में भले ही अव्यवस्था के कारण अभी तक सैकड़ों गाय मर चुकी हों, लेकिन एटा की गोशालाओं में गायों की बच्चों जैसी परवरिश होती है। जिले की सबसे बड़ी गोशाला के कड़े धार्मिक नियम हैं। जहां गाय के मरने पर अंतिम संस्कार और सुंदरकांड कराने तक की व्यवस्था है।
जिले की सबसे बड़ी श्रीगोपाल गोशाला में 315 गाय है, लेकिन उनके लिए चारा, भूसा, दाना, उपचार, देखभाल की बेहतर व्यवस्था है। गोशाला केयर टेकर नंदकिशोर कहते हैं गायों की देखभाल के लिए अकेले मंडी के व्यापारी दस लाख रुपये सालाना दान देते हैं। गोशाला पर हर महीने चार लाख रुपये खर्च होता है। गायों के लिए खेत से हरा चारा खरीदना, देखभाल के 6500 रुपये प्रति व्यक्त सेलरी पर 14 मजदूर, रिटायर्ड सीवीओ डा. लक्ष्मीकांत की देखरेख में उपचार के अलावा बीजेपी नेता विपिन वर्मा डेविड रोटियां और लोई एकत्र कर गोशाला पहुंचाते हैं। गोशाला में गाय बेची नहीं जाती, गाय के मरने पर विधिवत अंतिम संस्कार होता है। गोशाला में हर महीने सुंदरकांड कराया जाता है।
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पालतू गाय खा हीं पॉलीथिन, गोशाला में चारा
शहर में संचालित दोनाें गोशालाओं में गाय चारा खाती हैं, लेकिन लेकिन शहर में घूमने वाली पालतू गाय पॉलीथिन चाबाती दिखतीं हैं। गाय पालक सुबह गाय को छोड़ देते हैं और दिनभर चरने के बाद गाय खुद ही अपने मालिक के पहुंच जाती है।
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गुरुकुल आर्ष गोशाला का छात्र पीते हैं दूध
गुरुकुल आर्ष परिसर में पंजीकृत गोशाला है, लेकिन वहां रहने वाली गायों के लिए चारा और दाना यहीं तैयार होता है। आचार्य देवराज शास्त्री ने बताया कि गोशाला में 12 गाय है। गायों का दूध गुरुकुल में पढ़ने 70 वाले छात्र पीते हैं। गोशाला में गायों की देखभाल नौकर करते हैं। शास्त्री कहते हैं कि कई बार पशु पालन विभाग की टीम आई, गोशाला के लिए अनुदान को लेकर पूछताछ की, लेकिन अनुदान कभी नहीं मिला।
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छह में से तीन गोशालाएं संचालति
पशु पालन विभाग में जिले में नौ गोशालाएं पंजीकृत हैं। वर्तमान में दो एटा और एक जलेसर में गोशाला संचालित है। बाकी की छह गोशालाओं के नाम पते बचे हैं। वहां गाय हैं तक नहीं हैं।
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जलेसर स्थित श्रीगंगेश्वर स्वर्गाश्रम गोशाला में 125 गाय हैं। जिनकी देखभाल शहर के 500 से अधिक सदस्यों द्वारा मिलने वाले चंदे से होता है। गोशाला समिति अध्यक्ष मनोज मित्तल ने कहा कि गाय के मरने पर दफनाकर अंतिम संस्कार करते हैं। गायों की देखभाल पर हर महीने करीब 2 लाख रुपये खर्च होेते हैं।