ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकत्री आशा यूनियन की ओर से शुक्रवार को डीएम से आशाओं के बकाया भुगतान की मांग की गई। आशाओं का आरोप है कि मानदेय के नाम पर महीनों लटकाया जाता है।
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष वालेंद्र कटियार ने कहा कि आशा कर्मचारी आम जनता एवं स्वास्थ्य विभाग के बीच एक सेतु की तरह काम करती हैं। ऐसे में शासन की ओर से उन्हें मानदेय भी न के बराबर मिलता है। जो कभी समय से नहीं दिया जाता। इसके चलते आशाओं को अपना घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने यूनियन की मांगों के बारे में बताया कि आशाओं के बकाया का भुगतान 15 दिन दिन में हो जाना चाहिए। इस मौके पर कुसुमा देवी, अनुपम चौहान, पारूल राजपूत, शशी प्रभा, सुनीता, लक्ष्मी, पदमा, रीना, मिथलेश पाल, ममता, कांती आदि आशा मौजूद थीं।