एटा। खरमास के खत्म होते ही विवाह स्थल सज गए हैं। सोमवार से शादी की शहनाइयां गूंजना शुरू हो जाएंगी। शुभ मांगलिक कार्य गृह प्रवेश, सगाई, मुंडन की शुरूआत हो जाएगी।
हिंदू धर्म में खरमास के दौरान शुभ कार्य नहीं होते। इस दौरान मांगलिक कार्यों को करना दोष माना जाता है। 14 मार्च से खरमास की शुरूआत हुई थी। जिसके चलते विवाह समारोह एवं अन्य शुभ कार्यों पर एक माह का विराम लग गया था। सोमवार से फिर विवाह समारोह के साथ शुभ कार्यों की शुरूआत हो जाएगी। अब सहालगों की शुरूआत के साथ ही विवाह स्थल भी सजने लगे हैं।
साल में दो बार आता है खरमास
पंडित गिरिजेश पचौरी ने बताया कि खरमास साल में दो बार आता है। पहला जब सूर्य धनु राशि में होता है। दूसरा जब सूर्य मीन राशि में आता है। इस दौरान सूर्य का पूरा प्रभाव यानी तेज पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध पर नहीं पड़ता। सूर्य की इस कमजोर स्थिति के कारण ही इस दौरान पृथ्वी पर मांगलिक और शुभ कार्य अशुभ माने जाते हैं।
6 जुलाई से फिर लगेगी रोक
पं. पचौरी ने बताया कि 6 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और 4 माह बाद देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। 1 नवंबर को देवउठनी एकादशी धूमधाम से मनाई जाएगी। इसके साथ रूके हुए कार्य प्रारंभ हो जाएगें और शुभ कार्यों के साथ मांगलिक कार्यों की शुरूआत होगी।
किस माह में कितने मुहूर्त
अप्रैल :- 14, 16, 18, 19, 21, 25, 26, 29, 30
मई :- 1, 5, 6, 7, 8, 9, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18, 22, 23, 24, 28
जून :- 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10