राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक प्रमुख जगदीश ने कहा है कि बिना संगठन के किसी भी परिवर्तन की कल्पना नहीं की जा सकती। इसके लिए संगठन आवश्यक है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना विजय दशमी के मौके पर 1925 में की गई।
स्थापना से अब तक लगातार संघ सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कार्य कर रहा है।
प्रचारक प्रमुख जगदीश पथ संचलन से पूर्व शस्त्र पूजन कार्यक्रम के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को संगठित रहने की जरुरत है।
इस प्रकार के भाव का जागरण आज के दिन होना चाहिए। जिला कार्यवाहक दीपराज माहेश्वरी ने कहा कि विजय दशमी का पर्व शक्ति उपासना का दिन है। इस दिन की महत्वता के चलते शस्त्र पूजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि पथ संचलन के द्वारा संघ शक्ति तथा स्वयं सेवकों के अंदर अनुशासन का भाव जागृत किया जाता है।
इसके पश्चात प्रभुपार्क मैदान से गणवेशधारी स्वयं सेवकों का पथ संचलन शुरु हुआ। नगर की माल गोदाम, रेलवे रोड, गांधी मूर्ति, नदरई गेट बाजार, सोरों गेट, मोहल्ला जय जयराम, सहावर गेट सहित अन्य क्षेत्रों में स्वयं सेवकों ने भ्रमण किया।
जगह-जगह स्वयं सेवकों पर पुष्प वर्षा की गई। सबसे आगे घोड़े पर सवार स्वयं सेवक संघ की पताका लिए सवार थे। उसके पीछे कई गणों में स्वयं सेवक चल रहे थे। शस्त्रधारी, दंडधारी गणवेश थे।
पथ संचलन का नगर भ्रमण के बाद प्रभुपार्क में समापन हुआ। पथ संचलन का संचालन दीपराज माहेश्वरी ने किया। इस दौरान सहनगर कार्यवाहक कौशल साहू, सर्व व्यवस्था प्रमुख हरिपाल कुशवाह एवं जयपाल रहे।
इस दौरान वरिष्ठ पदाधिकारियों में विभाग संघ चालक उमाशंकर शर्मा, विभाग कार्यवाह राजकिशोर, नगर संघ चालक ज्ञान माहेश्वरी, सहनगर संघ चालक नरेश, घोष प्रमुख राजबहादुर, वरुण उपाध्याय, राजेंद्र कुमार, रमेश गोला, राजवीर, अशोक, हिमांशु, एदलसिंह, रामकुमार, भगवती, अजय, रामकिशोर, सुरेश, पूर्णेंद्र सोलंकी, बीडी राना, नीरज शर्मा, महेंद्र राना सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।