एटा। कच्ची शराब का कलंक मिटाने के लिए पुलिस गांव-गांव दस्तक दे रही है। लोगों को धीमे जहर से बचाने की इस अलग पहल में कच्ची शराब के नुकसान की जानकारी देकर इसका सेवन और कारोबार न करने की शपथ दिलाई जा रही है। इसके तहत आधा दर्जन गांवों में पुलिस की चौपाल लग चुकी है।
कच्ची शराब बनाने के लिए कई इलाके बदनाम हैं। इनमें थाना जैथरा क्षेत्र में काली नदी के किनारे के गांवों में तमाम कोशिशों के बाद भी कच्ची शराब का निर्माण नहीं रोका जा सका है। इसके बाद अलीगंज क्षेत्र के फर्रुखाबाद बॉर्डर के कई गांवों में कच्ची शराब का धंधा कुटीर उद्योग की तरह चलता है। जलेसर, निधौली कलां और कोतवाली देहात के भी कई गांव में कच्ची शराब बनाई जाती है। इन गांवों में सख्ती के अलावा अब सोशल पुलिसिंग के तहत भी काम शुरू किया गया है। एसएसपी उदय शंकर सिंह के निर्देश पर गांवों में चौपाल लगाकर लोगों की काउंसिलिंग की जा रही है।
कोतवाली देहात इसमें सबसे आगे है। प्रभारी निरीक्षक जगदीश चंद्र बताते हैं कि जब वह मैनपुरी में थाना कुरावली के प्रभारी निरीक्षक थे। तब काली नदी के किनारे बहुत सारे गांव में कच्ची शराब का कारोबार होता था। सख्त कार्रवाई से इस पर काबू नहीं पाया जा सका। बाद में लोगों के बीच जाकर समझाने और नुकसान की जानकारी दी तो सफलता मिली। यही फार्मूला यहां अपनाया, इसके परिणाम सकारात्मक आने की उम्मीद है। गांव नगला माची, नगला मुही, बदरिया, नगला समल, नगला इमलिया, रारपट्टी आदि में चौपाल लगाई जा चुकी है।