सिढ़पुरा विकास क्षेत्र की 94 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के मानकों
की धज्जियां उड़ा दी गई। सामग्री अंश में मानक से अधिक धनराशि का व्यय कर
दिया गया। जिलाधिकारी ने अतरिक्त धनराशि की वसूली के आदेश जारी किए हैं।
मनरेगा योजना के अंतर्गत श्रमांश पर 60 प्रतिशत एवं सामग्री पर 40
प्रतिशत धनराशि व्यय किए जाने का प्रावधान है, लेकिन 94 ग्राम पंचायतों में
इस मानक की अनदेखी की गई। एमआईएस में कराई गई फीडिंग में श्रमांश पर 5.26
लाख रुपये एवं सामग्री पर 6.90 लाख रुपये व्यय किया जाना दर्शाया गया।
सामग्री पर 3,39,333 रुपये अधिक खर्च किए गए। ग्राम विकास आयुक्त लखनऊ के
निर्देश पर अपर जिला कार्यक्रम समन्वयक ने नोटिस जारी कर 15 अप्रेल तक अपना
पक्ष रखने के निर्देश दिए, लेकिन किसी ने अपना पक्ष नहीं रखा।
ग्राम विकास
आयुक्त ने इसके लिए उपायुक्त श्रम के खिलाफ आरोप पत्र व निलंबन का
प्रस्ताव सहित दोषियों से वसूली के आदेश जारी किए। आदेश के आधार जिलाधिकारी
जेपी त्रिवेदी ने उपायुक्त श्रम रोजगार मनरेगा, कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा,
ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, तकनीकि सहायक, एवं रोजगार सेवक को इसके
लिए दोषी माना है। अतिरिक्त व्यय की गई धनराशि की इन सभी से वसूल करने के
आदेश जारी किए गए है।