एटा। बागवाला थाने में दर्ज दुष्कर्म के मामले में दोष साबित होने पर अदालत ने दो दोषियों को बीस बीस साल के कठोर कारावास व 60-60 हजार रुपया जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की धनराशि नियमानुसार पीड़िता को देने का आदेश दिया।
वादी 24 फरवरी 2015 को अपने पिता के साथ तेरहवीं की दावत में गया था। जब रात को वापस आया तो घर पर उसे अपनी 13 वर्षीय बेटी नहीं मिली। जिसकी गुमशुदगी थाने में दी। 26 फरवरी 2015 को सुबह 7 बजे वादी छत पर गया तो बेटी छत पर बेहोश मिली। जिसके हाथ बंधे हुए तथा मुंह में कपड़ा ठुंसा हुआ मिला। जिस पर वादी ने लोग बुलाए जब बेटी को होश आया तो उसने बताया कि उसे गांव बेंदुला निवासी मोहित पुत्र बगाली एवं राहुल पुत्र दिनेश ने उसके साथ गलत काम किया। इसके बाद वे लोग उसे सिढ़पुरा के ढूंढरा गांव ले गए। जहां फिर उसके साथ बुरा काम किया। उसने बताया कि इस काम में रामब्रेश, सरिता, गुड्डी, दुर्वेश व धर्मेंद्र ने सहयोग किया। बाद में वे लोग उसे 25 फरवरी को छत पर डाल गए।
अदालत के आदेश पर दर्ज मामले में जब पुलिस ने विवेचना की तो पीड़िता के बयान व सबूतों के आधार पर आरोपी मोहित व राहुल के खिलाफ आरोपपत्र अदालत भेजा। जहां अपर जिला शासकीय अधिवक्ता विनय शर्मा एवं विशेष लोक अभियोजक श्रीकृष्ण यादव ने गवाहों व सबूतों के माध्यम से आरोपों को साबित कराया। जिस पर विशेष न्यायाधीश एक्सक्लूसिव कोर्ट पोक्सो एक्ट विकास गुप्ता ने आरोपियों को दंडित किया।