गरीबी से जूझ रहे गांव जिरसमी निवासी वंशी ने शुक्रवार रात दम तोड़ दिया।
उसके पास खेती नहीं थी। मजदूरी करता था। परिवार में विकलांग भाई किशनपाल
(25) और अंधी मां भगवती (70) थी। वंशी अकेले कमाने वाला था। उसकी फरियाद
जीते जी भले ही किसी ने न सुनी लेकिन मौत के बाद प्रशासनिक अधिकारियों का
तांता लग गया। ग्रामीण भी सहायता के लिए आगे आए। ग्राम प्रधान ने भी मृतक
के परिवारीजनों के लिए राशन की व्यवस्था की। मृतक का पोस्टमार्टम कराया
गया।
शनिवार शाम को ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर उसकी अंत्येष्टि कराई। भाई
और मां का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार में वंशी अकेले ही कमाने वाले थे।
मौके पर पहुंचे सीडीओ साहब सिंह, एसडीएम अजीत कुमार सिंह ने परिवारीजनों और
ग्रामीणों से बात की। वहीं ग्रामीणों का कहना था कि प्रशासनिक अधिकारी
केवल खानापूर्ति कर रहे हैं अभी तक परिवार को कोई भी आर्थिक सहायता नहीं दी
गई है। अधिकारियों के आदेश के बाद ग्राम प्रधान ऊषा देवी ने पीड़ित परिवार
को 50 किलो गेहूं, 35 किलो आटा और चावल की व्यवस्था कराई। वहीं गांव के
कमल सिंह, हरीश चंद्र, तेजपाल, प्रेम सिंह ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सही
समय पर मृतक को आर्थिक सहायता मिल जाती तो वह भूखा नहीं मरता।
एक और परिवार ने लगाई गुहार
घटना
के बाद एक और परिवार ने आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। सीडीओ, एसडीएम गांव
में पहुंचे, तभी गांव का रामस्वरूप, उसकी मां अधिकारियों से आर्थिक सहायता
और राशन की मांग करने लगे। जिसके बाद सीडीओ ने रामस्वरूप के परिवार के लिए
भी राशन की व्यवस्था कराई।