एटा/सकीट। मशहूर फिल्म अभिनीत के गाने के बोल, जाने कहां गए वो दिन, होली पर बिल्कुल सटीक साबित हो रहे हैं। पहले होली का त्योहार आपसी प्रेम भाईचारे को कायम रखने के साथ हंसी ठिठोली और मस्ती का माध्यम माना जाता था, लेकिन अब होली बदल रही है। लोग इसकी आड़ में रंजिश निकालने लगे हैं। बुजुर्ग होली के बदलते स्वरूप से खुश नहीं हैं।
आज से दो दशक पहले होली के उल्लास से हर कोई प्रसन्न रहता था। उस दौरान लोग आपस में मिलकर खुशी से त्योहार मनाते थे, लेकिन वर्तमान में पिछले जमाने की होली अब बहुत कम देखने को मिलती है। वर्तमान में लोगों के बीच पहले जैसा प्यार और भाईचारे की कमी होने लगी है। बुजर्गों का कहना है कि पहले की तरह होली की टोली बहुत कम देखने को मिलती है। होली से एक माह पहले गांव में राग गाने की तैयारी होती थी लेकिन अब राग गाने की परंपरा पूरी तरह से समाप्त हो गई है। होली का त्योहार अब सिर्फ नशे का त्योहार बन गया है।