एटा। जैथरा विकासखंड क्षेत्र में अमृत सरोवर योजना के तहत बनाए गए 15 में से 10 सरोवर पूरी तरह सूखे पङे हैं। जिसके चलते खेती एवं पशु-पक्षियों के लिए पीने के पाली की समस्या हो रही है। ग्रामीणों के मुताबिक ये अमृत सरोवर सिर्फ नाम के लिए हैं। इनमें हर समय पानी होना चाहिए, जो कि नहीं रहता। बरसात के मौसम को छोङ दिया जाए तो अधिकांश समय यह सरोवर सूखे ही रहते हैं। इनके निर्माण के लिए काफी पैसा आया। फिर भी कोई अमृत सरोवर के लिए कोई काम होता नहीं दिखाई देता। कई जगह अमृत सरोवर मनरेगा के तहत न खुदवाकर जेसीबी मशीन से खुदवाए गए हैं।
दृश्य एकः- मानसून सिर पर, चल रहा निर्माण
ग्राम पंचायत खिरिया नगर शाह का अमृत सरोवर अभी निर्माणाधीन है। ग्रामवासियों का कहना है कि मानसून सिर पर है और सरोवर का काम चल रहा है। ऐसे में जल संचयन कैसे हो पाएगा। कछुआ गति से जब काम होगा तो कोई लाभ नहीं मिल पाएगा।
दृश्य दोः-तालाब लग रहा मैदान
ग्राम पंचायत तरगवां में अमृत सरोवर ऐसा लगता है जैसे कोई घास का मैदान हो। इस सरोवर में पानी तो है नहीं, हरी घास जरूर है। जिसे जानवर चरते हुए दिखाई देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अमृत सरोवर में केवल बरसात के मौसम में ही पानी रहता है। बाकी दिनों में यह सूखा पङा रहता है।
बोले लोग
करीब डेढ़ वर्ष पूर्व तालाब पर निर्माण कार्य जेसीबी से कराया गया था। आज तक पूरे गांव वालों ने कभी इससे भरा हुआ नहीं देखा है ।
योगेंद्र प्रताप सिंह, सदस्य ग्राम पंचायत तरगवां
अमृत सरोवर केवल कागजों पर होगा। मौके पर सिर्फ लोहे की तीन-चार कुर्सियां हैं। तालाब की जमीन उबड़-खाबड़ पड़ी है। कई बार जांच आईं, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जितेंद्र राठौर, तरगवां
किसी भी अमृत सरोवर में पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं है। जब बरसात होगी तो अमृत सरोवर अपने आप भर जाएंगे।
फैसल आलम, बीडीओ जैथरा