मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अभी तक कोई भी अधिकारी कर्मचारी पीड़ित किसानों को मुआवजा देने नहीं पहुंचा है। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक इस संबंध में उन्हें कोई शासनादेश नहीं मिला है, जबकि जिले में बरसात से फसलों को हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए गांव-गांव लेखपालों को भेजा गया है। तीन दिन के अंदर वे नुकसान का आंकलन कर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
बता दें कि हाल में जिले में लगातार तीन दिन तक हुई बरसात व तेज हवाओं के चलने से रबी की फसलों का खासा नुकसान पहुंचा है। इसमें गेहूं की फसल के अलावा आलू, मटर, तंबाकू, सरसों आदि की फसलें शामिल हैं। इन फसलों में किसानों के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक पैदावार प्रभावित होगी। इसके इतर कृषि विभाग के अधिकारी इन फसलों में 25 से 30 प्रतिशत तक के नुकसान का आंकलन कर रहे हैं। दूसरी ओर फसलों में हुए नुकसान के चलते कई किसानों की मौत भी हो चुकी है। इधर, शासन के आदेश अभी तक हवा हवाई साबित हुए हैं, चूंकि पहले खरीफ की फसलें सूखा से प्रभावित हुई थीं। इसके चलते शासन ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया था, लेकिन छह महीने के बाद भी किसानों को सूखा राहत राशि अभी तक नहीं मिली है। इस संबंध में किसान यूनियनों ने कई बार जिला मुख्यालय पर आंदोलन कर मुआवजे की मांग की। वहीं हाल में हुए बरसात से फसलों के नुकसान का मुआवजा पीड़ित किसानों को दिए जाने की राजनैतिक दल व किसान संगठन मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने फसल के नुकसान के सदमे में मरे किसानों के परिवारीजनों को पांच-पांच लाख रुपये देने व तत्काल वसूली स्थगित करने के आदेश दिए हैं।अपर जिलाधिकारी वित्त व राजस्व राजेंद्र कुमार का कहना है कि अभी तक शासन का कोई आदेश नहीं मिला है, जैसे ही आदेश आएंगे अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले में बरसात से फसलों को हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए गांव-गांव लेखपाल भेजे हैं। तीन दिन के अंदर वे नुकसान का आंकलन कर रिपोर्ट सौंपेंगे।